लूट मची है लूट , जितना मर्ज़ी उतना लूट
बेरोजगारों का दर्द न देख , उनके घर का कर्ज़ न देख
अपनी जिद की खातिर , उनके सपनो का दर्द ना देख
लूट मची है लूट ,
जितना मर्ज़ी उतना लूट
तेरे घर नोटों की बरसात , उसके घर न रहा अनाज
अपनी भूख दिखाई दे बस , उसके पेट का हाल ना देख
लूट मची है लूट , जितना मर्ज़ी उतना लूट
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