आजमगढ़ : 'यहां तो पूरे कुएं में भांग मिली हुई है' ये देसी कहावत इस
वक्त बेसिक शिक्षा महकमे पर पूरी तरह सटीक बैठ रहा है। शैक्षिक गुणवत्ता तो
छोड़िए, स्कूल को मान्यता मिली है कि नहीं, पहले अभिभावक यह पता करें, मसलन
स्कूल फर्जी तो नहीं चल रहा है।
अब एक नई समस्या यह है कि शिक्षक की
डिग्री सही है कि नहीं। आपका बच्चा जिस स्कूल में गुरुजी से ज्ञान ले रहा
है, उनकी डिग्री सही है कि नहीं। स्कूल फर्जी, गुरुजी की डिग्री फर्जी और
इन सबके बीच फंसे अभिभावक व उनके नन्हें-मुन्ने बच्चे। हालांकि शिक्षा
विभाग ऐसे लोगों की धरपकड़ में जुटा हुआ है। जांच में कार्रवाईयां हो रही
हैं लेकिन इनकी नियुक्ति किसने की। इसकी तरफ आला अफसरों का ध्यान नहीं है।
जनपद में फर्जी शिक्षकों का नेटवर्क कई प्रांतों से जुड़ा हुआ है। पिछले
दो दशक में सैकड़ों शिक्षकों ने विभिन्न प्रांतों व जनपदों से फर्जी
मार्कशीट बनवाकर नौकरी पा ली। पिछले एक सप्ताह के भीतर इस तरह के लगभग चार
शिक्षकों व एक लिपिक के विरुद्ध बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है। इसमें एक
शिक्षक दूसरे के प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहा था तो एक स्वतंत्रता संग्राम
सेनानी का प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी कर रहा था। अब दो ऐसे शिक्षक भी सामने आ
गए जो वाराणसी के संपूर्णानंद महाविद्यालय के नाम से बने फर्जी अंक पत्र
पर नौकरी कर रहे थे। अभी यह कार्रवाई मात्र एक नजीर है। अभी सैकड़ों ऐसे
शिक्षक हैं जो फर्जी रूप से शिक्षक बनकर सरकार व विभाग की आंख में धूल
झोंकने का काम कर रहे हैं।
जनपद में कुल 3250 परिषदीय विद्यालय हैं। इसमें 2267 प्राथमिक
विद्यालयों की संख्या तथा 983 जूनियर विद्यालयों की संख्या है। प्राथमिक
विद्यालयों में कुल 8865 शिक्षक तैनात हैं जबकि जूनियर विद्यालय में 3575
शिक्षक तैनात हैं, यानी कुल 13430 शिक्षक तैनात हैं। इसमें सैकड़ों शिक्षक
ऐसे हैं जिन्होंने फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी पाई है। शासन ने पिछले एक
दशक के शिक्षकों की संपूर्ण डिग्री की जांच के निर्देश दिए हैं। यही नहीं
उनकी डायरेक्ट नियुक्ति की भी जांच करनी है। पिछले एक पखवारे के अंदर में
जनपद में पांच फर्जी शिक्षक पकड़े गए हैं। इनमें से पांचों की सेवा समाप्त
कर दी गई। इसके अलावा अभी 15000 व 16448 शिक्षक भर्ती में अभी सैकड़ों
शिक्षक फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। इनके वेतन रोकने की
कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा तमाम मामले अर्थ एवं संख्या अधिकारी
अर्चना ¨सह व तत्कालीन अपर सांख्यिकीय अधिकारी सुनील ¨सह ने भी पकड़ा है।
15000 व 16448 नियुक्ति में तो पूरा रैकेट ही पकड़ में आया है। फिलहाल अभी
तक यह मामला पें¨डग है। कुल मिलाकर यहां फर्जी शिक्षकों का जाल फैला हुआ
है। ठेकमां विकास खंड में एक ऐसा शिक्षक है जिसने अपने नाम रिश्तेदारों को
फर्जी डिग्री लगाकर सहायक अध्यापक बनवा दिया है। उसके विरुद्ध भी कार्रवाई
होनी है। इसी प्रकार आगरा विश्वविद्यालय से भी कई लोगों ने फर्जी डिग्री के
आधार पर नौकरी पाई है। कुल मिलाकर पूरा फर्जी डिग्री का सि¨डकेट यहां से
जुड़ा हुआ है। फर्जी शिक्षकों पर अब तक हुई कार्रवाई
16 जुलाई : वैभव राय को फर्जी प्रमाण पत्र पर बर्खास्त किया गया
18 जुलाई : रवि राय को फर्जी स्वतंत्रता सेनानी का प्रमाण लगाने पर सेवा बर्खास्त
18 जुलाई : तहबरपुर विद्यालय पर तैनात एक लिपिक अरुण कुमार राय को भी बर्खास्त किया गया
20 जुलाई : फर्जी स्नातक की डिग्री लगाने पर दो शिक्षकों की सेवा
समाप्त की गई ''शासन के आदेश का कड़ाई से पालन किया जाएगा। किसी भी कीमत पर
फर्जी डिग्री लगाकर नौकरी करने वाले शिक्षकों को बख्शा नहीं जाएगा। जांच
में डिग्री फर्जी मिलने पर उन्हें बर्खास्त तो किया ही जाएगा, साथ ही साथ
उनके खिलाफ एफआइआर भी दर्ज कराई जाएगी।''
-देवेंद्र कुमार पांडेय, बेसिक शिक्षा अधिकारी आजमगढ़।
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