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जिले के अंदर गुपचुप तरीके से चला तबादले का खेल , सवालों के घेरे में शासन की कार्यवाई, नए सिरे से मांगी गयी रिपोर्ट

इलाहाबाद : गर्मी की छुट्टी में गुपचुप तरीके से परिषदीय शिक्षकों का जिले के अंदर तबादले का बड़े पैमाने पर खेल चला। जिले से लेकर बेसिक शिक्षा परिषद मुख्यालय तक एक ‘तंत्र’ बन गया था, जिसने तबादलों को अंजाम दिया।
संभल के बीएसए ने बिना अनुमोदन लिए 200 से अधिक तबादले कर दिए, सो वह निलंबित हो गए हैं, लेकिन प्रदेश में ऐसे कई बेसिक शिक्षा अधिकारी हैं, जिन्होंने मनमाने तरीके से फेरबदल किया है। उनकी जांच तक नहीं हुई है। हालांकि अब शासन ने सभी बीएसए से जिले के अंदर हुए तबादलों की नए सिरे से रिपोर्ट मांगी है।
बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों का तबादला एवं समायोजन हर साल होता है।
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हर बार के नियम भी बदलते रहते हैं। इस बार सभी का जोर अंतर जिला तबादलों पर रहा है, आम शिक्षक एवं शिक्षक संगठन यही रट लगाए थे। ऐसे में काफी देर से ही सही अंतर जिला तबादले का आदेश जारी हुआ। इसके पहले ही प्रदेश के लगभग सभी जिलों में जिले के अंदर तबादले की प्रक्रिया बिना किसी औपचारिक निर्देश के शुरू हो गई। एक महीने में हजारों की तादाद में तबादले कर दिए गए। इसमें पहुंच एवं पैसे का बोलबाला रहा। इसे ‘दैनिक जागरण’ ने ‘बीएसए और बाबुओं ने कराए हजारों तबादले’ प्रमुखता से उजागर किया। इससे जिले से लेकर परिषद तक में हड़कंप रहा। उसी बीच संभल के बीएसए रहे अफसर को इस आधार पर निलंबित कर दिया गया कि उन्होंने जिले के अंदर 200 से अधिक तबादले बिना अनुमोदन कर दिए।

शासन की इस कार्रवाई पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि इससे अधिक मनमाने तबादले सूबे के कई जिलों में हुए हैं, लेकिन वहां कार्रवाई दूर उन प्रकरणों की जांच तक नहीं हो रही है, बल्कि अफसरों की ही वाहवाही की जा रही है। इसमें सबसे ऊपर उन्नाव जिले का नाम आ रहा है, जहां करीब आठ सौ तबादले हुए हैं। खास बात यह है कि अंतर जिला तबादलों में शासन ने तीन साल से कम सेवा वाले शिक्षकों का फेरबदल करने से मना किया है, लेकिन उन्नाव आदि कुछ जिलों में एक वर्ष पहले शिक्षक बनने वालों का भी तबादला किया गया है। इसकी जानकारी कुछ अफसरों को भी है, लेकिन उन्होंने आंखें मूंद ली हैं।
‘जागरण’ की खबर का शासन ने संज्ञान लिया है और सभी जिलों से अंतर जिला तबादले का ब्योरा मांगा गया है। इसका बाकायदे प्रोफार्मा हर जिले को भेजा गया है जिसमें अध्यापक के नाम से लेकर परिषद सचिव के अनुमोदन तक जिक्र करना होगा। माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट पहुंचने पर स्थिति साफ होगी और कई और बीएसए पर निलंबन की गाज गिर सकती है। हालांकि जून में बेसिक शिक्षा निदेशक ने यही सूचनाएं मांगी थी, लेकिन तमाम जिलों से रिपोर्ट भेजी ही नहीं जा सकी है।
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