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पटरी पर नहीं लौट रही परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा

बिजनौर : दो दशक पहले तक हर बड़े पद पर पहुंचने वाले अधिकांश व्यक्ति परिषदीय विद्यालयों से पढ़कर आते थे। आज भी शिक्षा विभाग में तैनात अनेक अधिकारी स्वयं परिषदीय विद्यालयों से शिक्षा लेकर आए हैं, लेकिन आज गरीब परिवार भी अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाने से मुंह मोड़ रहे हैं।
वजह, करोड़ों रुपये प्रतिवर्ष प्रत्येक जिले में खर्च होने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निरीक्षण में शिक्षक-शिक्षिकाएं स्कूलों से गायब मिल रहे हैं।
शासन व शिक्षा विभाग के तमाम प्रयास के बावजूद परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा पटरी पर नहीं आ रही है। सरकार ने गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सीबीएसइ पैटर्न पर परिषदीय विद्यालयों का समय परिवर्तन किया। साथ ही प्रत्येक माह टेस्ट कराने की व्यवस्था की गई। योग्य शिक्षक होने के बाद भी परिषदीय विद्यालय अभिभावकों का विश्वास जीतने में विफल साबित हो रहे हैं। इसका बड़ा कारण दूरदराज के स्कूलों में एक शिक्षक ही तैनात है। अनेक शिक्षक शिक्षिकाएं समय से विद्यालय नहीं पहुंच रहे, तो अनेक अवकाश का प्रार्थना पत्र विद्यालय में रखकर कई कई दिन गायब रहते हैं। उधर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महेशचंद्र का कहना है कि बिना सूचना गायब मिलने के कई मामले उन्होंने स्वयं पकड़े हैं। सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। वह नियमित चे¨कग अभियान चलाकर फरार रहने वाले शिक्षकों को दंडित करेंगे। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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