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फीस व सर्टिफिकेट वापसी पर संस्थानों की मनमानी थमेगी, 15 दिन के अंदर लौटानी होगी छात्रों की पूरी फीस, हाथों-हाथ लौटाने होंगे छात्र के सभी ओरिजनल कागजात

नई दिल्ली 1निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए छात्रों की फीस हजम कर जाना या ओरिजनल सर्टिफिकेट लौटाने में देरी करना अब संभव नहीं होगा। लगातार मिल रही ऐसी शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अब इस संबंध में बेहद सख्त नियम तैयार किए हैं।
इसके तहत अगर छात्र तय समय में फीस वापसी का आवेदन करे तो 15 दिन के अंदर उसकी पूरी फीस अनिवार्य रूप से लौटानी होगी। इसी तरह छात्र के ओरिजनल कागजात संस्थान को हाथों-हाथ लौटाने होंगे। साथ ही संस्थान एक बार में एक सेमेस्टर या साल से ज्यादा की फीस नहीं ले सकता। 1यूजीसी की ओर से अधिसूचित किए गए नए नियमों के मुताबिक संस्थान अब छात्र से एक बार में सिर्फ एक सेमेस्टर या वर्ष की फीस ही ले सकेंगे। अगले सेमेस्टर या पूरे पाठ्यक्रम की फीस एडवांस में लेने पर पूरी तरह प्रतिबंध होगा। अगर दाखिला प्रक्रिया समाप्त होने के 15 दिन पहले तक छात्र ने अपने एडमिशन वापसी के लिए आवेदन किया तो उसे पूरी फीस वापस करनी होगी। इसी तरह प्रवेश प्रक्रिया समाप्त होने के 15 दिन बाद तक भी आवेदन किया गया तो उसे 80 फीसद फीस लौटानी होगी। इसके 15 दिन बाद यानी प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के एक महीने की अवधि तक वह आधी फीस काट सकता है। प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के एक महीने के बाद ही वह पूरी फीस जब्त कर सकेगा। इन नियमों में कॉशन और सिक्योरिटी मनी को छोड़ कर सभी तरह की कोर्स फीस और दूसरी फीस शामिल होंगी। प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर भी संस्थान 10 फीसद से ज्यादा रकम नहीं काट सकेगा। 1विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, ‘इस संबंध में लगातार मिलती रहने वाली शिकायतों और मुकदमों की बड़ी संख्या को देखते हुए नई अधिसूचना तैयार की गई है। इससे खास तौर पर निजी उच्च शिक्षण संस्थानों की मुनाफाखोरी और ब्लैकमेलिंग पर रोक लग सकेगी। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी।’ सभी विश्वविद्यालयों को अनिवार्य रूप से इस संबंध में अलग से शिकायत निवारण समिति (जीआरसी) गठित करनी होगी। यूजीसी को कोई शिकायत मिली तो यह विश्वविद्यालय की जीआरसी से सफाई मांगेगी। जीआरसी 20 दिन के अंदर जवाब देगा जिससे संतुष्ट नहीं होने पर यूजीसी उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है। 1नए नियमों के मुताबिक उच्च शिक्षण संस्थानों को किसी भी समय छात्रों को किसी भी अकादमिक या व्यक्तिगत सर्टिफिकेट की ओरिजनल कॉपी रखने का अधिकार नहीं होगा। इसमें छात्र की मार्कशीट, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट और बर्थ सर्टिफिकेट आदि सभी महत्वपूर्ण कागजात शामिल होंगे। संस्थान सिर्फ इन कागजात की छात्र की ओर से स्वत: प्रमाणित कॉपी ही रख सकेंगे। दाखिले के समय संस्थान मूल प्रमाणपत्रों की जांच कर सकता है, मगर छात्र की मौजूदगी में ही यह जांच पूरी कर उसे कागजात लौटाने होंगे। पाठ्यक्रम के दौरान भी संस्थान किसी भी मौके पर छात्र को ओरिजनल कागजात जमा करने के लिए नहीं कह सकता। किसी तरह की आशंका होने पर वह सर्टिफिकेट जारी करने वाले संस्थान से सीधे संपर्क कर उसकी पुष्टि कर सकता है। 1लागू नहीं हो रहे थे पुराने नियम : यूजीसी ने माना है कि फीस और सर्टिफिकेट वापसी को लेकर वर्ष 2007 में जारी निर्देश का पालन नहीं हो रहा। इसी वजह से इसकी 15 नवंबर को हुई बैठक में नए नियमों को मंजूरी दी गई है। इसके बाद छह दिसंबर को यूजीसी के सचिव जेएस संधू ने सभी संस्थानों को पत्र लिख कर नए नियमों पर आगाह भी किया है कि संस्थान अपने नियमों में जरूरी बदलाव कर लें।

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