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व्यवस्था ज्यादा दोषी या शिक्षक??? एकबार पोस्ट जरूर पढ़ें

एक पोस्ट पर किसी सज्जन ने लिखा की अध्यापक महीना बांध लेते है और स्कूल नही जाते यद्धपि उन्होंने ठीक लिखा बस उनको लिखना ये था की 'कुछ' शिक्षक महीना बांध लेते है ये सही भी है ऐसा हो भी रहा है इसमें कोई शक नही कुछ शिक्षक ऐसा कर रहे है
एनसीआर से आने वाली काफी शिक्षिका ऐसा कर रही है और ये निश्चित रूप से अपराधिक बात है राजकोष का नुकसान है और साथ ही साथ उन बच्चों के प्रति भी गलत हो रहा है जो विद्यालय शिक्षा लेने आते है।
पर सवाल ये है की जो शिक्षक ऐसा कर रहे है वो तो दोषी है ही साथ वो लोग भी दोषी है जो ऐसा होने दे रहे है बिना अधिकारी के ये सम्भव नही की कोई स्कूल ना आये और उसे घर बैठे वेतन मिलता रहा...अध्यापक ऐसी हरकत तब ही कर पाते है/कर रहे है जब वो अपने अधिकारियो को इस बात के लिए निश्चित धनराशि रिस्वत के रूप में दे कर आते होंगे इसलिए दोषी वो व्यवस्था भी  है जिसका वो लाभ रहे है ....जिन भी स्कूलो में ऐसा हो रहा है जिन भी ब्लाक में ऐसा हो रहा है वहां के अधिकारियो पर कार्यवाही हो
जो भी लोग ऐसी व्यवस्था बनवाने में दोषी है उन पर भी सख्त कार्यवाही होनी चाहिए
जो शिक्षक अपने दायित्व सही से निभा रहे है उनके लिए ऐसे आरोप निश्चित रूप से हतोत्साहित करने वाले है समाज में उनकी प्रतिष्ठा को ऐसे लोगो की वजह से हानि पहुँचती है....
काफी दिन से शिक्षको को लेकर अनाप शनाप कहा जा रहा है इसलिए ये पोस्ट लिखने की जरूरत पड़ी यदि ऐसे कुछ शिक्षको की वजह से सबको सुनना पड़े तो जो शिक्षक कार्य अच्छा कर रहे है उनकी प्रशंशा भी की जानी चाहिए। बेसिक में कुछ शिक्षको अधिकारियो की वजह से सभी को एक जैसा मान लेना गलत है।
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