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देश की न्यायिक और शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुधारों की जरूरत: जेटली

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को न्यायिक और शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुधारों का आह्वान करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में सुधार लंबे समय से अपेक्षित हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को पर्याप्त प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है ताकि वे भविष्य में जीवन के हर क्षेत्र के अगुवा बन सकें।

सिंबायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड यूनीवर्सिटी) के 14वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इन क्षेत्रों में किस तरह के सुधारों की जरूरत है। जेटली ने ग्रेजुएट हो रहे छात्र-छात्रओं को सलाह दी कि वे खुद को इस तरह तैयार और प्रशिक्षित करें ताकि विदेश में सेवा देने के योग्य बन सकें। उन्होंने कहा, ‘यह हमारी जनसंख्या के इस्तेमाल का सबसे बेहतरीन तरीका है।’ उन्होंने आगे कहा कि सरकार अकेले इतने लोगों के लिए रोजगार सृजित नहीं कर सकती। इस संदर्भ में जेटली ने कहा कि लोगों को प्रशिक्षित करने और उनके कौशल विकास के लिए निजी क्षेत्र को और प्रयास करने की जरूरत है। अन्यथा देश की जनसंख्या फायदे की बजाय दायित्व बनकर रह जाएगी। इससे पूर्व सिंबायोसिस के कुलपति एसबी मजूमदार ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर चिंता व्यक्त की जिसमें सर्वोच्च अदालत ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से कहा था कि वह किसी भी निजी संस्थान को खुद को यूनीवर्सिटी के रूप में प्रचारित करने की अनुमति न दे। इस मौके पर जाने-माने उद्योगपति राहुल बजाज को डीलिट की मानद उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि आय में लगातार बढ़ती जा रही असमानता की वजह से आमजन खासतौर से गरीब लोग उद्योगपतियों और कारोबारियों से नफरत करते हैं। अगर असमानता पर ध्यान न दिया गया और रोका न गया तो दुनिया के अन्य हिस्सों की तरह भारत में भी हिंसक विरोध शुरू हो जाएगा।

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