लखनऊ हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने टीचर्स एलिजबिलिटी टेस्ट (टीईटी)-2017 के 14 प्रश्नों में गड़बड़ी के कारण सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा -2018 टाल दी है। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि 14 गलत प्रश्नों के नंबर हटाकर फिर से टीईटी-2017 का परिणाम घोषित किया जाए।
एक माह में यह प्रक्रिया पूरी की जाए, उसके बाद ही सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा करवाई जाए। कोर्ट ने कहा कि 15 अक्टूबर-2017 को करवाई गई टीईटी में नैशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) के नियमों का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने पाया कि टीईटी में 8 प्रश्न गलत थे। संस्कृत भाषा के दो प्रश्नों के विकल्प गलत थे। चार प्रश्न पाठ्यक्रम के बाहर से थे व लैंग्वेज के पेपर में उचित नंबर के प्रश्न नहीं थे।
जस्टिस राजेश सिंह चैहान की बेंच ने मंगलवार को यह आदेश टीईटी-2017 को चुनौती देने वाली 300 से अधिक रिट याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए पारित किया। याचिकाओं में कहा गया था कि परीक्षा एनसीटीई के दिशा-निर्देशों के तहत नहीं करवाई गई। परीक्षा नियंत्रक प्राधिकरण के सचिव ने 24 दिसम्बर 2014 को शासनादेश जारी किया था। शासनादेश के तहत जो पाठयक्रम तय किया गया था कई प्रश्न उससे बाहर से पूछे गए। कुछ प्रश्न गलत थे, तो कई के विकल्प गड़बड़ थे। इन्हीं गड़बड़ियों की वजह से याचियों ने टीईटी-2017 रद करने की मांग की थी।
सरकार के तर्क खारिज
सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह ने तर्क दिया कि टीईटी में विफल अभ्यर्थियों को परिणाम को चुनौती देने का अधिकार नहीं है। यह भी कहा कि एनसीटीई के दिशा-निर्देश बाध्यकारी नहीं है, लेकिन कोर्ट ने महाधिवक्ता के तर्कों को सारहीन करार दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि टीईटी में ऐसे लाखों शिक्षामित्र शामिल हुए थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से झटका मिला था और वे टीईटी परीक्षा पासकर नियमित शिक्षक बनने की कोशिश में लगे हैं। ऐसे भी अभ्यर्थी थे, जो बीटीसी पास हैं और बतौर शिक्षामित्र काम भी कर रहे थे। कोर्ट ने कहा कि जब परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों में गड़बड़ी साफ दिख रही है तो याचिकाओं में दखल न देना उचित प्रतीत नहीं हेाता है।
सरकार ने डाली अड़चन
कोर्ट ने आदेश में तारीखवार ब्योरा भी लिखवाया कि किस प्रकार सरकार की ओर से मामले में शीघ्र सुनवाई में अड़चन डाली गई। कोर्ट ने कहा कि सरकार की ओर से करवाई जाने वाली परीक्षाएं काफी बड़ी होती हैं और उनमें लाखों लोग शामिल होते हैं। अत: किसी भी फजीहत से बचने के लिए परीक्षा करवाने वाली एजेंसी को चाहिए कि परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों से आपत्तियां मांगे और उनके निस्तारण के बाद ही परीक्षा परिणाम घोषित किए जाएं।
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