इलाहाबाद : अपर निजी सचिव यानि एपीएस परीक्षा 2010 की भी सीबीआइ जांच
होने की तैयारी है। आयोग और सचिवालय में भर्ती के लिए 250 पदों पर चयन की
इस परीक्षा में व्यापक रूप से गड़बड़ी और अभ्यर्थियों के गलत तरीके से चयन
की जानकारी सीबीआइ से की जा चुकी है। नियुक्ति और कार्मिक विभाग शीघ्र ही
इस संबंध में पत्र उप्र शासन को भेजेगा। संस्तुति के बाद जांच शुरू हो
जाएगी।
एक अप्रैल, 2012 से 31 मार्च, 2017 के बीच हुई भर्तियों की जांच कर रहे
सीबीआइ अफसरों को मई माह में आयोग में ही इसके बड़े सबूत मिले थे कि एपीएस
2010 परीक्षा में पूर्व अध्यक्ष डा. अनिल यादव के नेतृत्व वाली परीक्षा
समिति ने मनमानी की थी। पता चला था कि इस समिति ने कई अभ्यर्थियों से
बैकडेट में प्रमाण पत्र लगवाए थे और इसका प्रस्ताव भी समिति ने पारित किया
था। उसी दौरान सीबीआइ ने आयोग में कार्यरत एक ऐसे अपर निजी सचिव से पूछताछ
की थी जो पहले राजकीय डिग्री कालेज में अच्छी पे स्केल पर कार्यरत था। माता
पिता की बीमारी का बहाना बनाकर उसने लेक्चरर की नौकरी छोड़ने की बात कही
थी जिसे सीबीआइ ने सही नहीं माना था।
इसकी प्रारंभिक परीक्षा 21 सितंबर, 2013 में हुई थी और इसका अंतिम परिणाम
अंतिम परिणाम तीन अक्टूबर, 2017 को आया था। इसलिए इस परीक्षा की जांच
सीबीआइ जांच की तय अवधि से बाहर थी।
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