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68500 टीचर भर्ती से खत्म हो सकता है कटऑफ, बढ़ाया जा सकता है मानदेय

इलाहाबाद। यूपी में जो युवक पुलिस की नौकरी के जरिए अपना करियर बनाना चाहते हैं उनके लिए अच्छी खबर आई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन युवाओं के लिए नौकरी के रास्ते खोल दिए हैं। ये फैसला यूपी पुलिस के खाली पदों को जल्द से जल्द भरने के विषय को लेकर है।

 हुई 41610 कांस्टेबल भर्ती में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर बड़ा रास्ता अभ्यर्थियों लिए खोल दिया है। हाईकोर्ट ने इस भर्ती में खाली पड़े हजारों पदों को भरने वाले आदेश में दुबारा याचिका दाखिल होने पर राज्य सरकार से जवाब मांगा तो हाईकोर्ट की मंशा के अनुरूप राज्य सरकार ने अभ्यर्थियों को राहत दे दी है।
हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार ने अपना पुराना आदेश वापस ले लिया है और अब नए सर्कुलर का फायदा 13 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को मिलेगा। यानी यह खबर उन अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी लेकर आई है जो उत्तर प्रदेश पुलिस की 41610 कांस्टेबल भर्ती में शामिल हुए थे पर उनका सिलेक्शन नहीं हुआ था। अब 2312 खाली पदों को भरने के लिए पुनरीक्षित चयन सूची जारी की जायेगी। जिसमें 13 हजार अभ्यर्थियों को मौका मिलेगा और उनसे ही मेरिट लिस्ट तैयार होगी।
क्या है मामला
गौरतलब है कि 2013 की 41610 कांस्टेबल भर्ती में 2312 पद खाली रह गए थे। यह सभी पद छैतिज आरक्षण के तहत रिक्त थे और सरकार ने इन पदों को अगली भर्ती के लिए कैरी फॉरवर्ड कर दिया था। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार यह खाली पद को बदले नियम के अनुसार भरा जाना चाहिए था। लेकिन, प्रदेश सरकार ने आरक्षण नियमावली के नियम 3(5) के तहत अगली भर्तियों के लिए अग्रसारित कर दिया था। इसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में 2013 की भर्ती वाले अभ्यर्थियों ने चैलेंज किया था। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया और आरक्षण नियमावली की धारा 3(5) को असंवैधानिक करार देते हुए पुलिस स्थापना बोर्ड को 6 महीने के अंदर मेरिट के आधार पर खाली पड़े पदों को भरने को कहा था।

बैकफुट पर सरकार
सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुक्रम में केवल ऐसे अभ्यर्थियों को बुलाने का फैसला लिया था जिन्होंने याचिका दाखिल की थी और यही अधिसूचना जारी की गई। सरकार के इस फैसले को फिर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और कोर्ट से सभी बचे अभ्यर्थियों को बुलाने का आदेश देने की मांग की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा तो राज्य सरकार ने जारी की गई अधिसूचना वापस ली और कोर्ट को बताया कि पुनरीक्षित चयन सूची तैयार करने में सभी 13 हजार अभ्यर्थियों पर विचार होगा। मांग स्वतः पूरी हो जाने के कारण कोर्ट ने याचिका निस्तारित कर दी है। जिससे अब 13 हजार से अधिक अभ्यर्थियों को नौकरी पाने का मौका मिलेगा।

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