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यूपी में विवादों की अंतहीन श्रृंखला बनती जा रहीं शिक्षकों की भर्तियां, सरकार ने विकल्प न तलाशे तो बढ़ेगा युवाओं में आक्रोश

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश के विभिन्न जिलों से आये युवाओं का जमावड़ा, सरकार के खिलाफ नारेबाजी और विरोध को दबाने के लिए लाठीचार्ज। भर्तियों को लेकर लगातार बढ़ रहे विवादों की यह परिणति है और युवाओं का आक्रोश आएदिन राजधानी में फूट रहा है।
शुक्रवार को 65800 सहायक अध्यापक भर्ती के अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज से यह साफ है कि अब आक्रोशित युवाओं को नियंत्रित कर पाना सरकार के लिए आसान नहीं है और उसे विकल्प तलाशने होंगे।
यह विडंबना ही है कि समाजवादी शासनकाल में भर्तियों को लेकर शुरू हुआ विवादों का सिलसिला भाजपा शासन में बरकरार है। 68500 सहायक अध्यापकों की भर्ती में टीईटी पास 37 हजार शिक्षकों के लिए अवसर था लेकिन, इनमें से महज 7200 ही पास कर सके। शेष तीस हजार को तो मायूसी हुई ही है, मानदेय पर काम कर रहे एक लाख से अधिक शिक्षामित्र भी हताशा में हैं। शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवपूजन सिंह बताते हैं कि पिछले चार महीनों से उन्हें मानदेय नहीं मिल सका है। एरियर का पिछला बकाया भी नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार जनवरी में संभावित 97 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती के बाद शिक्षामित्रों के लिए सारे अवसर खत्म हो जाएंगे। हाल ही में प्राथमिक विद्यालयों की 12460 पदों की भर्ती रद होने ने भी अभ्यर्थियों को बड़ा झटका दिया है।
दूसरी कई भर्तियों ने भी युवाओं की कुंठा बढ़ाई है। 41520 सिपाहियों की भर्ती का दूसरा पेपर आउट होने के बाद रद करना पड़ा। अब अभ्यर्थियों को परीक्षा का इंतजार है। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की नलकूप चालक परीक्षा भी पेपर आउट होने के वजह से ही रद करनी पड़ी। इस आयोग की अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा को लेकर भी विवाद खड़े हुए। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग महाविद्यालयों के असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर नियुक्ति नहीं दे सका। माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में प्रधानाचार्य भर्ती-2011 के 955 पदों पर भर्ती अदालती विवादों की वजह से अटकी है।’
>65800 सहायक अभ्यर्थियों की भर्ती ने भी युवाओं को किया मायूस
’>>सरकार ने विकल्प न तलाशे तो बढ़ेगा युवाओं में आक्रोश

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