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परिषदीय शिक्षकों की ‘लास्ट इन फर्स्ट आउट’ ट्रांसफर पॉलिसी रद, हाईकोर्ट ने इस आधार पर कहा शासनादेश को गैरकानूनी

जूनियर व सीनियर बेसिक स्कूलों के सहायक अध्यापकों के सम्बंध में राज्य सरकार द्वारा बनाई गई ट्रांसफर पॉलिसी ‘लास्ट इन फर्स्ट आउट’ को विधिसम्मत न पाते हुए, हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दिया है।
हालांकि न्यायालय ने राज्य सरकार को अध्यापकों के तबादले व समायोजन के सम्बंध में राइट ऑफ चिल्ड्रेन टू फ्री एंड कम्पलसरी एजुकेशन एक्ट, 2009 के तहत नई पॉलिसी बनाने की छूट दी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति इरशाद अली की एकल सदस्यीय पीठ ने सैकड़ों शिक्षकों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया। याचीगण वर्ष 2015, 2016 और 2017 में नियुक्त हुए थे। याचियों का कहना था कि 20 जुलाई 2018 के शासनादेश द्वारा, सहायक अध्यापकों के लिए ट्रांसफर पॉलिसी जारी की गई। जिसके शर्त संख्या 2(2)(1) व 2(3)(4) में ‘लास्ट इन फर्स्ट आउट’ व अध्यापकों और छात्रों का अनुपात निर्धारित किया गया। इनके तहत अध्यापकों और छात्रों का अनुपात 1:40 का होगा व यह 1:20 से कम नहीं होगा। इस प्रकार ‘लास्ट इन फर्स्ट आउट’ पॉलिसी के तहत यदि अध्यापकों की संख्या किसी संस्थान में अनुपात से अधिक हो जाती है तो जो अध्यापक संस्थान में लम्बे समय से तैनात हैं, वह वहीं तैनात रहेगा और बाद में प्रमोशन से जाने वाले का दूसरे संस्थान तबादला कर दिया जाएगा।

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