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डरे नहीं, एआई को अपनाकर अपनी नौकरी सुरक्षित बनाएं

 क्या एआई सचमुच नौकरियां खत्म करेगा या नए अवसर पैदा करेगा? क्या भारत इस तकनीकी बदलाव का नेतृत्व कर सकता है? ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशने के लिए राजधानी में चल रही एआई समिट में हिन्दुस्तान

न सिर्फ भागीदार बना बल्कि बदलाव की कहानी का सहभागी बनकर मौजूद है। सम्मेलन के पहले दिन हमारे संवाददाताओं ने पैनल चर्चाओं, तकनीकी सत्रों और वैश्विक विशेषज्ञों से सीधी बातचीत के जरिए बदलती दुनिया की तस्वीर समझी। टेक दिग्गजों ने संकेत दिया कि एआई केवल चुनौतियां नहीं, बल्कि नए कौशल आधारित रोजगार के अवसर भी लेकर आ रहा है...

पांच अहम सुझाव

1. आज के दौर में एआई के साथ चलने का सबसे बड़ा मंत्र है

2. एआई से दोस्ती करें, नए प्लेटफार्म पर कौशल विकसित करें

3. यह पहचानें कि उन्हें खुद में एआई से जुड़े कौन से स्किलसेट अपग्रेड करने हैं

4. नीतियों के बारे में नहीं सोचें, यह जानें कि किस कौशल से आपकी नौकरी बनी रहेगी

5. लगातार हो रहे बदलावों के साथ खुद को भी अपडेट करें

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल से तकनीकी उद्योगों में नौकरियों पर खतरे की चिंताओं के बीच अग्रणी उद्यमियों ने इस डर को हावी नहीं होने देने की सलाह दी है। उनका कहना है कि एआई से नौकरियां जाने का डर नहीं, बल्कि कर्मचारियों के लिए अपनी नौकरी सुरक्षित रखने का अवसर है।

उद्यमियों का सुझाव है कि एआई से घबराने के बजाय इसे सीखने पर ध्यान देना चाहिए। एआई टूल्स को सीखकर और कौशल बढ़ाकर कर्मचारी एआई के साथ कदम मिला सकते हैं। सोमवार को ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में ‘एआई के दौर में रोजगार का भविष्य’ विषय पर सत्र आयोजित किया गया।

इस दौरान ‘इंफो एज’ के संस्थापक संजीव बिखचंदानी ने भारत में कंप्यूटरों की शुरुआत का उदाहरण दिया। कहा कि जब बैंकों में पहली बार कंप्यूटर लाए गए, तब किसी की नौकरी नहीं गई। इसके बजाय उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई। एआई से नौकरियां जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि नौकरीपेशा और युवाओं को एआई से जुड़ी नीतियों के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्हें बस इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि एआई उनके लिए किस तरह जरूरी हो सकता है।


इससे वे अपने काम में एआई को बेहतर साधन के तौर पर शामिल करने के साथ कुशल बनेंगे। उन्हें यह समझना होगा कि एआई की वजह से उनकी नौकरी जाए नहीं, बल्कि इसकी मदद से उनकी नौकरी बनी रहे और नौकरी के दूसरे अच्छे अवसर पाने में भी मदद मिले।

आप एआई नहीं करेंगे, तो भी एआई आपके साथ होगा : बिखचंदानी ने सलाह दी कि युवाओं को लगातार एआई टूल्स सीखने चाहिए। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में एआई बढ़ रहा है। अगर आप एआई नहीं करेंगे, तो भी किसी न किसी तरह एआई आपके साथ हो ही जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि ‘एआई की लहर’ के साथ तैरने के लिए लंबे समय तक सीखना जरूरी है। कहा कि एआई अगले तीन से पांच साल की अवधि में लगातार विकसित होगा, जिससे तकनीकी उद्यमों में नौकरियों का ढांचा भी लगातार बदलता रहेगा।

नवाचार की जानकारी ली : सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप कंपनियों के प्रतिनिधियों से बातचीत की और नवाचार की जानकारी ली। वह स्वदेशी एआई मॉडल सर्वम स्टार्टअप के स्टॉल भी पहुंचे, जो स्पीच टू टेक्स्ट के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने भारत जेन सहित कई स्वदेशी मॉडल का अवलोकन किया। इस आयोजन में एआई आधारित कई भारतीय स्टार्टअप शिरकत कर रहे हैं। मोदी ने जियो, मेटा के पवेलियन का भी दौरा किया।

भारत एआई बनाने वाला देश : सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि आज भारत एआई का सिर्फ उपयोग करने वाला नहीं, बल्कि इसे बनाने वाला देश भी बन रहा है।

भारत में एआई कौशल दुनिया के मुकाबले सबसे अधिक है और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ज्यादा नियमों से बचने की नीति अपनाई है। इस बीच, पूर्व विदेश सचिव शशांक का कहना है कि एआई डिप्लोमेसी से भारत ग्लोबल साउथ की मुखर आवाज बनेगा। यह समिट इस दिशा में बड़ा कदम है। भारत एआई इकोसिस्टम में गैर बराबरी को पाटने में मददगार हो सकता है, जिससे हमारी छवि ग्लोबल साउथ के अघोषित अगुवा के तौर पर और पुख्ता होगी।

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