Advertisement

उत्तर प्रदेश में शिक्षक ओवरबर्डन: पढ़ाई और प्रशासनिक ड्यूटी का भार

उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में इस समय एक गंभीर समस्या उभर कर सामने आई है — शिक्षकों पर अत्यधिक कार्यभार या ओवरबर्डन। बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी, जनगणना गतिविधियों, उपस्थिति रिकॉर्ड अपडेट, रिपोर्ट तैयार करना और अन्य प्रशासनिक कार्यों के बीच शिक्षक अपने मूल कर्तव्य शिक्षण पर पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं।

यह स्थिति खासकर उन जिलों में और अधिक चिंताजनक हो जाती है जहां बोर्ड परीक्षाएं और जनगणना एक साथ चल रही हैं। ऐसे में शिक्षक का कार्यभार न केवल शैक्षणिक गुणता को प्रभावित करता है बल्कि छात्रों के सीखने के अनुभव पर भी नकारात्मक असर डालता है।


🔹 शिक्षक कार्यभार — समस्या की गहराई

उत्तर प्रदेश के अनेक स्कूलों में शिक्षक अनुभव कर रहे हैं कि:

✔️ बोर्ड परीक्षा के दौरान ड्यूटी का भार बढ़ जाता है
✔ जनगणना जैसे सरकारी कार्यक्रमों में भी सहभागिता अनिवार्य कर दी जाती है
✔ नियमित कक्षाओं को समय देना कठिन हो जाता है
✔ प्रशासनिक रिपोर्टिंग और प्रबंधन में अधिक समय खर्च होता है
✔ छात्रों की पढ़ाई पर व्यक्तिगत सहायता कम मिल पाती है

इस वजह से शिक्षक मानसिक तनाव, थकान और कार्य में कमी का सामना कर रहे हैं।


🔹 बोर्ड परीक्षा और जनगणना — दोहरी जिम्मेदारी

बोर्ड परीक्षाओं में शिक्षक:

📍 परीक्षा केंद्रों पर उपस्थित रहते हैं
📍 अनुशासन और समय पर संचालन को सुनिश्चित करते हैं
📍 प्रश्न पत्र वितरण, निगरानी और रिपोर्टिंग करते हैं

जब शिक्षक को इसी बीच जनगणना ड्यूटी भी दी जाती है, तो उसका समय विभाजन और भी जटिल हो जाता है। इसी ड्यूटी बोझ का परिणाम यह होता है कि:

👉 शिक्षक अपनी कक्षा की तैयारी समय पर नहीं कर पाते
👉 छात्रों के शैक्षणिक प्रश्नों को समय नहीं मिल पाता
👉 शिक्षा गुणवत्ता प्रभावित होती है


🔹 अभिभावक और छात्रों की प्रतिक्रिया

अभिभावकों और छात्रों में भी यह चिंता है कि शिक्षक परीक्षा ड्यूटी और जनगणना जैसे административ कार्यों के कारण पढ़ाई का समय कम कर रहे हैं। कई अभिभावकों का कहना है कि:

“शिक्षक का प्राथमिक कर्तव्य पढ़ाना है। जब वह परीक्षा या अन्य कामों में बंधा रहेगा, तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।”

छात्रों ने भी बताया कि उन्हें नियमित पढ़ाई के अलावा अतिरिक्त समय और मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है, जो कभी-कभी उपलब्ध नहीं होता।


🔹 शिक्षा विभाग के विचार

शिक्षा विभाग का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं और जनगणना जैसे गतिविधियों में शिक्षकों की सहायता आवश्यक है, लेकिन इसके साथ ही विभाग यह भी मानता है कि इस ओवरबर्डन से बचने के लिए नवीन प्रबंधन और सहायता तंत्र विकसित करना आवश्यक है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि:

✔ अतिरिक्त सहायकों की तैनाती की जा सकती है
✔ परीक्षा और जनगणना के बीच कार्य विभाजन को संतुलित किया जायेगा
✔ प्रशासनिक बोझ को कम करने के लिए तकनीकी सहायक प्रणाली लागू की जा सकती है


🔹 समाधान के सुझाव

विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षक ओवरबर्डन का समाधान न केवल विभागीय रणनीति में है, बल्कि कई सुधार भी आवश्यक हैं:

📌 दोहरी भूमिकाओं का पुनर्मूल्यांकन
📌 अन्य कर्मचारियों / सहायक अधिकारियों की तैनाती
📌 टेक्नोलॉजी आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली
📌 अतिरिक्त कार्यों के लिए अलग ड्यूटी शेड्यूल
📌 छात्र स्वयं सहायता टीचरों का सहयोग

इन सुझावों से शिक्षक की प्राथमिकता — छात्रों की पढ़ाई — सुरक्षित रह सकती है।


🟩 निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में शिक्षक ओवरबर्डन का मुद्दा शिक्षा गुणवत्ता पर सीधे प्रभाव डाल रहा है। बोर्ड परीक्षा और जनगणना जैसी ड्यूटी का बोझ यदि संतुलित व प्रबंधित तरीके से न संभाला गया, तो इसका नकारात्मक असर छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन पर दिखाई देगा।

शिक्षक, प्रशासन, अभिभावक और नीति निर्माता मिलकर एक संतुलित समाधान खोजना आवश्यक है, ताकि शिक्षक का समय कक्षा अध्यापन और छात्र सफलता में निवेशित रह सके।


UPTET news