लखनऊ. उत्तर प्रदेश के शिक्षा मित्रों को योगी सरकार ने राहत दी है। यूपी सरकार शिक्षा मित्रों का दिसंबर के मानदेय का भुगतान जल्द करेगा। यूपी सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में काम करने वाले लगभग डेढ़ लाख शिक्षा मित्रों के मानदेय के लिए धनराशि भेज दी है।
सरकार ने शिक्षा मित्रों के मानदेय का भुगतान उनके बैंक खातों में भेजने के लिए निर्देश दिए गए हैं। सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक डॉ. वेदपति मिश्र ने इस बारे में यूपी के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को आदेश जारी कर दिए हैं।
दिए ज्वाइनिंग के आदेश
वहीं आपको बता दें कि इससे पहले हाईकोर्ट ने ऐसे शिक्षा मित्रों को ज्वाइनिंग देने के आदेश दिए हैं, जिन्होंने दूरस्थ माध्यम से बीटीसी का प्रशिक्षण प्राप्त किया है और 15000 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे। दरअसल बेसिक शिक्षा विभाग ने दूरस्थ माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षा मित्रों को काउंसलिंग में शामिल करने से मना कर दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के तहत इनकी काउंसलिंग तो कराई गई थी, लेकिन उनका रिजल्ट नहीं जारी किया गया।
इनकी याचिका पर दिए आदेश
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र ने संभल जिले के बाबू खान और अन्य शिक्षा मित्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए रिजल्ट जारी कर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है। याचिका दायर करने वालों के वकील सीमांत सिंह के मुताबिक यूपी सरकार की योजना के तहत शिक्षा मित्रों को दूरस्थ माध्यम से बीटीसी की ट्रेनिंग दी गई थी। NCTE ने यूपी सरकार को एक जनवरी 2011 को इसकी अनुमति भी दे दी थी। इनमें से कई शिक्षा मित्रों ने 15000 सहायक अध्यापक भर्ती के लिए आवेदन किया था। लेकिन दूरस्थ माध्यम से ट्रेनिंग करने के कारण बेसिक शिक्षा विभाग ने इनको काउंसलिंग में शामिल नहीं होने दिया था। शिक्षा मित्रों की याचिका पर वकील ने दलील दी कि जब एनसीटीई ने ट्रेनिंग की अनुमति दे दी तो फिर इस वजह से नियुक्ति देने से इंकार करने का कोई मतलब नहीं है। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए रिजल्ट जारी कर नियुक्ति देने का निर्देश दिया है।
संशय की स्थिति बरकरार
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिला अध्यक्ष सुधाकर तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के समायोजित शिक्षा मित्रों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी संशय की स्थिति बरकरार है। काफी लंबी लड़ाई लड़ने के बाद भी शिक्षा मित्र में निराशा व्याप्त है। शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्हें समय से मानदेय भी नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण उनके सामने आर्थिक कठिनाइयां भी आ रही हैं। सुधाकर तिवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों ने आत्महत्या कर ली है और कई शिक्षक अवसादग्रस्त हो चुके हैं। लेकिन सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही।
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