पीलीभीत : उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय प्राथमिक और उच्च
प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल
पा रही है, जिससे आधारीय ज्ञान काफी कमजोर है। इन बच्चों की शिक्षा देने
में हर साल लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन नतीजा कोई खास नहीं
निकलता है। इसके बावजूद शिक्षक-शिक्षिकाएं अपना रवैया सुधारने का नाम नहीं
ले रहे हैं।
जिलेभर में 1800 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं,
जिनमें पौने दो लाख छात्र-छात्रएं अध्ययनरत हैं। अनिवार्य एवं नि:शुल्क
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत परिषदीय स्कूलों में पदों पर
शिक्षक-शिक्षिकाओं की भर्ती है। बच्चों को नियमानुरूप सुविधाएं प्रदान की
जा रही हैं। शिक्षक-शिक्षिकाओं को समय-समय पर रिफ्रेशर कोर्स कराया जाता
है। रिफ्रेशर कोर्स करने के बाद बच्चों को शिक्षा की नई तकनीक का लाभ नहीं
मिलता है। वर्तमान हालत यह है कि स्कूलों में पंजीकृत बच्चों से काफी कम
उपस्थिति हो रही है। पंजीकरण होने के बावजूद बच्चे स्कूल ही नहीं आते हैं।
सिर्फ सरकारी सुविधाएं लेकर घर बैठ जाते हैं। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने
वाले बच्चों को भोजन, किताबें, ड्रेस, जूता, मोजा, बैग, होमवर्क बुक आदि की
सुविधाएं दी जाती हैं। इन बच्चों को पढ़ाने की बजाय सिर्फ रस्म अदायगी की
जाती है। शिक्षक-शिक्षिकाएं फर्ज की अदायगी सही ढंग से नहीं करते हैं। इसी
वजह से शिक्षा की गुणवत्ता धीरे-धीरे खराब होती जा रही है। बच्चों को
सिलेबस की जानकारी भी नहीं होती है। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में पढ़ाने
वाले शिक्षक अपने स्थान पर दूसरों को रख देते हैं। वह खुद दूसरा काम करते
नजर आते हैं। इसी वजह से परिषदीय स्कूलों की साख में गिरावट आई है। अभी कुछ
सालों से स्कूलों में नई तैनाती की गई, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में कुछ
सुधार जरूर नजर आ रहा है। विभागीय अफसरों को शिक्षक-शिक्षिकाओं के शिक्षण
कार्य की मॉनीटरिंग करनी चाहिए, तभी स्कूलों में पठन-पाठन बेहतर किया जा
सकेगा। जिला मुख्यालय के परिषदीय आदर्श पूर्व माध्यमिक विद्यालय नगर
क्षेत्र में पंजीकृत 33 बच्चों में से 19 उपस्थित मिले। इसी परिसर के
परिषदीय आदर्श विद्यालय में 60 में से 25 बच्चे उपस्थित रहे। इस तरह बच्चों
की उपस्थिति काफी कम हो रही है, जबकि स्कूल में शिक्षक, बच्चे, सुविधाएं
उपलब्ध हैं। इसके बावजूद बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
इस दिशा में सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे, तभी कुछ सुधार किया जा सकेगा।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के मुताबिक, परिषदीय स्कूलों में बच्चों को
बेहतर शिक्षा प्रदान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों में औचक
चेकिंग कर शिक्षा की गुणवत्ता परखी जा रही है। बच्चों के स्तर में कुछ
सुधार जरूर दिखाई दिया है। आगे भी बेहतर परिणाम सामने आएंगे।
मॉडल स्कूलों से सुधर सकती है शिक्षा की दशा: प्रत्येक जनपद में मॉडल स्कूल
खोले जाने की योजना को साकार किया जा रहा है। पीलीभीत जनपद में दो मॉडल
स्कूल संचालित किए जा रहे हैं।
sponsored links:
लेटेस्ट Sarkari Naukri, Govt Jobs, Results, Admit Card, Exam Dates और Education News के लिए भरोसेमंद वेबसाइट – E Sarkari Naukri Blog
Important Posts
Social Media Link
Advertisement
Breaking News
- 2004 में शिक्षामित्रों की नियुक्तियों हेतु जारी विज्ञप्ति: इसी विज्ञप्ति के आधार पर हुआ था शिक्षामित्रों की का चयन
- 🔥 वरिष्ठता सूची नियम 2026: प्राथमिक शिक्षकों की वरिष्ठता कैसे तय होगी? पूरी जानकारी
- UPTET 2026: परीक्षा में शामिल होने की अनुमति, लेकिन अवकाश नहीं—BSA का आदेश
- TET छूट बिल | क्या है वायरल खबर की सच्चाई?
- UPTET 2026 आवेदन से जुड़ी महत्वपूर्ण समस्याएं एवं समाधान 🚨
Govt Jobs : Opening
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें