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डीएलएड 2018: आवंटन पत्र को देना होगा 10 हजार, परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव की पहल पर प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

इलाहाबाद : डीएलएड (पूर्व बीटीसी) 2018 में अभ्यर्थी आवंटन पत्र हासिल करने के बाद सीट छोड़ने या फिर बदलने का साहस नहीं कर सकेंगे। इसकी वजह यह है कि उन्हें अब आवंटन पत्र हासिल करने के लिए दस हजार रुपये का भुगतान करना होगा, जबकि पिछले वर्षो में सीट लॉक कराने को मात्र दो हजार रुपये ही देना पड़ रहा था।
प्रवेश लेने पर यह धन तय फीस में समायोजित होगा लेकिन, सीट छोड़ने, बदलने या फिर अभिलेख गड़बड़ होने पर यदि प्रवेश नहीं मिलता है तो धनराशि वापस नहीं होगी। 1परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की पहल पर डीएलएड 2018 की प्रवेश प्रक्रिया में कई अहम बदलाव किए गए हैं। आवंटन पत्र की धनराशि बढ़ाने का कारण पिछले वर्ष का अनुभव रहा है। बीते वर्ष तय सीटों के सापेक्ष बड़ी संख्या में आवेदन हुए और तमाम अभ्यर्थियों ने पहली व दूसरी ऑनलाइन काउंसिलिंग में सीटें भी लॉक कराई लेकिन, ऐन मौके पर वह प्रवेश लेने नहीं पहुंचे। इससे पिछले वर्ष 19 हजार से अधिक सीटें प्रदेश भर में खाली रह गईं। अफसरों ने माना कि सीट लॉक कराने की धनराशि मामूली होने से अभ्यर्थियों ने प्रवेश लेने में ना-नुकुर की, इसीलिए अब यह धन दस हजार रुपये किया गया है, ताकि अभ्यर्थी गंभीर होकर ही आवंटन पत्र हासिल करेंगे और फिर उसे छोड़ने से पहले कई बार सोचेंगे, क्योंकि दस हजार रुपये जैसी बड़ी धनराशि वापस नहीं मिलेगी। केवल प्रवेश लेने पर ही इसका समायोजन होगा।


  • पिछले वर्ष तक इस कार्य के लिए दो हजार रुपये का हो रहा था भुगतान
  • केवल उसी को अगले चरण में मौका मिलेगा, जिसे आवंटन नहीं हुआ


ओटीपी से होगा आवेदन पूर्ण
प्रवेश में इस बार से आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को ऑनलाइन आवेदन पत्र में संशोधन का मौका नहीं दिया जा रहा है, क्योंकि संशोधन के नाम पर पिछले वर्षो में तमाम अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड बदल दिए गए थे। इसे रोकने के लिए ओटीपी यानि वन टाइम पासवर्ड सिस्टम भी लागू किया गया है। आवेदन पत्र भरने व प्रिंट लेने के बाद अभ्यर्थी के मोबाइल पर ओटीपी नंबर आएगा, इसे वेरीफाई करने पर ही आवेदन पूर्ण होगा। ऐसे में अभ्यर्थियों को अपना मोबाइल सही से भरना होगा।

सीट आवंटन के बाद अवसर खत्म
प्रवेश में इस बार यह भी नियम लागू हुआ है कि जिस अभ्यर्थी को वरीयता क्रम के अनुरूप संस्थान व सीट का आवंटन हो जाएगा, उसका संबंधित प्रशिक्षण संस्थान में प्रवेश लेना अनिवार्य होगा। एक बार सीट आवंटन के बाद अगले चरण या फिर पूरी प्रवेश प्रक्रिया में फिर से प्रशिक्षण संस्थान पाने का ऑनलाइन विकल्प दोबारा नहीं दिया जाएगा। केवल उसी अभ्यर्थी को अगले चरण में मौका मिलेगा, जिसे संस्थान का आवंटन नहीं हो पाता है। पिछले वर्ष एक अभ्यर्थी हर चरण में संस्थान पाने के लिए काउंसिलिंग करता रहा है। यह नियम इसलिए लागू किया गया है कि ताकि हर हाल में दो चरण में ही सारी सीटों पर प्रवेश पूरा हो जाए।

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