लखनऊ: कहते है शिक्षक समाज की तस्वीर को बदल सकते हैं बस उनके अंदर
सामाजिक सरोकारों को लेकर सोच पैदा होने की जरूरत होती है। नारी शिक्षा
निकेतन में मनोविज्ञान विभाग की शिक्षिका रही मधु भाटिया ने शिक्षिका के
तौर पर पॉलीथिन के विरुद्ध जो जंग छेड़ी वह रिटायर होने के 12 साल बाद भी
जारी है।
1 पुराने कपड़ों से आकर्षक बैग बनाकर पड़ोसियों और रिश्तेदारों को
निश्शुल्क देकर पॉलीथिन के खिलाफ जिस जंग की शुरुआत की वह अब आने वाली
पीढ़ियों को जागरूक करने तक पहुंच गई है। घरों में काम करने वाली महिलाओं
को बैग बनाने की निश्शुल्क ट्रनिंग भी देती हैं। पार्क रोड स्थित आवास पर
प्रशिक्षण देकर पॉलीथिन के खिलाफ उनकी यह आवाज अब उनकी पहचान बन गई है।
बैग वाली दीदी : पॉलीथिन के खिलाफ पुराने कपड़े के बैग से जंग लड़ने वाली
मधु भाटिया अब अपने नाम से कम बैग वाली दीदी की नाम से ज्यादा पहचानी जाती
हैं। उन्हें जो भी जानता वह बैग वाली दीदी के नाम से ही जानता है। मधु
भाटिया का कहना है कि आपका छोटा सा प्रयास समाज को नई दिशा दे सकता है।
मेरे इस अभियान से राजधानी का एक भी व्यक्ति पॉलीथिन का इस्तेमाल नहीं करता
है तो यह हमारे लिए सबसे बड़ी जीत होगी।
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