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शेयर बाजार गिरेगा तो भी नहीं डूबेगी रकम

 भारतीय शेयर बाजार में अब तक रिटेल निवेशक केवल बाजार के ऊपर जाने पर ही मुनाफे की उम्मीद करते थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब शेयर बाजार नीचे गिरता है, तब भी मुनाफा कमाया जा सकता है?

दुनियाभर के बाजारों में लगातार जोखिम बढ़ता जा रहा है। ऐसे में निवेशकों के पास जोखिम को कम करने और अस्थिरता का फायदा उठाने के लिए नए विकल्प सामने आ रहे है। ऐसा ही एक विकल्प है स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (एसआईएफ)। एसआईएफ एक ऐसी आधुनिक वित्तीय रणनीति है, जो पारंपरिक म्यूचुअल फंड की सीमाओं को तोड़कर और एक कदम आगे बढ़ने का मौका देती है। भारतीय निवेश बाजार में इसकी खूब चर्चा हो रही है। इसे लोग एक नए दौर की शुरुआत की तरह देख रहे हैं। आइए जानते हैं कि क्या है एसआईएफ और इसमें कैसे निवेश करते हैं...




1. लचीलापन


निवेशक सुविधा के अनुसार राशि, समय और आवृत्ति तय कर सकते हैं। मासिक ही नहीं, बल्कि तिमाही या अन्य अंतराल पर भी निवेश संभव होता है।


2. अनुशासित निवेश की आदत


यह नियमित निवेश को बढ़ावा देता है, जिससे निवेशक घबराए बिना लंबे समय तक निवेश जारी रख पाते हैं।


3. मार्केट टाइमिंग का झंझट नहीं


इस सुविधा में बाजार के उतार-चढ़ाव का औसत लाभ मिलता है। कभी ज्यादा, कभी कम यूनिट्स मिलने से रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा होता है।


4. कम रकम से शुरुआत


एसआईएफ के जरिए छोटी राशि से भी निवेश शुरू किया जा सकता है, जिससे पहली बार निवेश करने वालों के लिए यह आसान बन जाता है।


5. ऑटो-डेबिट की सुविधा


बैंक खाते से तय तारीख पर पैसा अपने-आप कट जाता है। इससे निवेश में कोई चूक नहीं होती।


6. लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न


लंबे समय में पूंजी तेजी से बढ़ सकती है, खासकर इक्विटी म्यूचुअल फंड में।


7. लक्ष्य आधारित निवेश


निवेशकों को रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदने जैसे काम के लिए योजनाबद्ध निवेश कर सकते हैं।


8. टैक्स प्लानिंग में सहायक


ईएलएसएस जैसे टैक्स सेविंग फंड में एसआईएफ के जरिए निवेश करने पर आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत टैक्स छूट का लाभ मिल सकता है।


स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (एसआईएफ) एक ऐसा आधुनिक कवच है जो बाजार की गिरावट में भी मुनाफा कमाने के लिए 'शॉर्ट सेलिंग' का उपयोग करता है, जिससे आपका पोर्टफोलियो सेंसेक्स के गिरने पर भी सुरक्षित रह सके।


एसआईएफ में 10 लाख रुपये की न्यूनतम निवेश सीमा के साथ, ये फंड पारंपरिक म्यूचुअल फंड और महंगे पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (पीएमएस) के बीच के अंतर को खत्म करने का काम करता है। बंधन, आईसीआईसीआई और 360 वन जैसे दिग्गज अब लॉन्ग-शॉर्ट रणनीतियों के जरिए बाजार की गिरावट में भी रिटर्न देने की तैयारी में हैं।


क्या है ये नया 'सेफ्टी लॉक'?


पारंपरिक म्यूचुअल फंड में अगर बाजार 20 फीसदी गिरता है, तो आपका फंड भी लगभग उतना ही गिरता है। लेकिन एसआईएफ के तहत फंड मैनेजर्स को 25% तक शॉर्ट एक्सपोजर लेने की अनुमति है। इसका मतलब है कि अगर बाजार गिरने वाला है, तो मैनेजर एडवांस डेरिवेटिव्स का उपयोग करके गिरते हुए शेयरों से भी मुनाफा कमा सकते हैं, जो आपके पोर्टफोलियो का नुकसान समायोजित कर देता है।


टैक्स और रिटर्न के मामले में क्या है खास बात?


एसआईएफ को इस तरह से तैयार किया गया है कि वे टैक्स के मामले में काफी बेहतर साबित होते हैं। विशेषकर हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड्स में ऋण और इक्विटी का ऐसा तालमेल होता है कि निवेशकों को 'कैपिटल गेन' का बेहतर फायदा मिलता है। क्वांट, एसबीआई और टाटा जैसे फंड हाउस पहले ही इस रेस में आगे चल रहे हैं, और नवंबर 2025 तक ये फंड 2,900 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जुटा चुके हैं, जो इनकी बढ़ती लोकप्रियता का सबूत हैं।


₹10 लाख की शर्त


यह फंड उन गंभीर निवेशकों के लिए है जो जोखिम को समझते हैं। यह न्यूनतम 50 लाख रुपये वाले पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) और न्यूनतम एक करोड़ रुपये वाले अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (एआईएफ) के मुकाबले सस्ता है।


निकासी का नोटिस पीरियड


लिक्विड फंड्स की तरह इसमें तुरंत पैसा नहीं निकलता। इसमें 15 दिनों तक का नोटिस पीरियड हो सकता है, ताकि घबराहट में बिकवाली के समय फंड मैनेजर को औने-पौने दाम पर शेयर न बेचने पड़ें।


विशेषज्ञ प्रबंधन

ऐसे फंड को चलाने वाले मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) के पास कम से कम 5,000 करोड़ रुपये के फंड प्रबंधन का 10 साल का अनुभव होना अनिवार्य है।

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