लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों में परिषदीय विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था इन दिनों बुरी तरह प्रभावित है। कारण है शिक्षकों की ड्यूटी एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाना। बीते तीन महीनों से अनेक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बेपटरी हो गई है।
📉 तीन महीने से प्रभावित शिक्षण व्यवस्था
प्रदेशभर में हजारों शिक्षकों को:
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एसआईआर (मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण)
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चुनाव संबंधी कार्य
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अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों
में लगाए जाने से विद्यालयों में नियमित पढ़ाई नहीं हो पा रही है। कई स्कूलों में एक या दो शिक्षक ही बचे हैं, जिससे कक्षाएं संचालित करना मुश्किल हो गया है।
🚨 प्राथमिक शिक्षक संघ का कड़ा ऐतराज
इस स्थिति को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध जताया है। हजरतगंज स्थित डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ भवन में आयोजित संयुक्त बैठक में संघ ने प्रदेशव्यापी धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने कहा कि:
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शिक्षकों का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है
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गैर-शैक्षणिक कार्यों से शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन हो रहा है
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सरकार को इस पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए
📚 टीईटी और वेतन विसंगतियों का मुद्दा
बैठक में यह भी कहा गया कि टीईटी की अनिवार्यता के कारण प्रदेश के लगभग दो लाख शिक्षक मानसिक रूप से परेशान हैं। संघ ने मांग की कि प्रभावित शिक्षकों को आवश्यक छूट दी जाए।
साथ ही:
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वेतन विसंगतियों पर कई बार ज्ञापन दिए गए
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लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला
जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
⚖️ खंड शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
संघ ने आरोप लगाया कि कुछ खंड शिक्षा अधिकारी शिक्षकों को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। इसे लेकर:
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धरना-प्रदर्शन
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मुकदमा दर्ज कराने
तक की चेतावनी दी गई है।
🤝 बैठक में बनी अहम सहमति
संघ की बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी, जिनमें शामिल हैं:
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सरप्लस समायोजन के खिलाफ शासन स्तर पर संवाद
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पीड़ित शिक्षकों को राहत दिलाने का प्रयास
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शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों के परिवारों के लिए
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निशुल्क चिकित्सा
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स्वास्थ्य सुरक्षा सुविधा
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🧑🏫 शिक्षा के अधिकार पर सवाल
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में बड़े पैमाने पर शिक्षकों की ड्यूटी लगाए जाने से शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के उद्देश्यों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बच्चों की नियमित पढ़ाई बाधित होना भविष्य के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।