लखनऊ से शिक्षकों से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर की गई घोषणा के बावजूद अभी तक शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू नहीं हो सकी है। इस देरी को लेकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने गहरी नाराजगी जताई है।
संघ ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है, ताकि शिक्षकों को घोषित सुविधा का लाभ मिल सके।
🏥 क्या थी शिक्षक दिवस पर की गई घोषणा?
शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा यह घोषणा की गई थी कि:
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बेसिक व माध्यमिक शिक्षकों को
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शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को
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राज्यकर्मियों के समान
कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
इस घोषणा से प्रदेश के लाखों शिक्षकों में उम्मीद जगी थी, लेकिन अब तक यह केवल घोषणा बनकर ही रह गई है।
⚠️ अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप
माध्यमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि:
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मुख्यमंत्री स्वयं इस योजना की घोषणा कर चुके हैं
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इसके बावजूद विभागीय अधिकारी आदेश जारी नहीं कर पाए हैं
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आवश्यक औपचारिकताएं पूरी न होने से योजना अटकी हुई है
संघ का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर उदासीनता के कारण शिक्षक लाभ से वंचित हैं।
🧑🏫 संघ अध्यक्ष का बयान
संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि:
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सभी श्रेणी के शिक्षकों को यह सुविधा देने की घोषणा हुई थी
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अब तक आदेश जारी न होना दुर्भाग्यपूर्ण है
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इससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है
उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
📢 मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव से अपील
शिक्षक नेताओं ने:
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मुख्यमंत्री
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अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा
का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकृष्ट कराते हुए मांग की है कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने से जुड़ी सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी की जाएं, ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके।
🇮🇳 शिक्षकों की भूमिका और अपेक्षाएं
भारत में शिक्षक को गुरु का स्थान दिया गया है। ऐसे में:
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स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधा
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समय पर लागू न होना
शिक्षक समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गया है। यह सुविधा लागू होने से न केवल शिक्षकों को, बल्कि उनके परिवारों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।