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ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव से बचना है तो फ्लोटर फंड में निवेश करें

 फ्लोटर फंड ऐसे म्यूचुअल फंड हैं जो बाजार की ब्याज दरों के हिसाब से रिटर्न देते हैं। फ्लोटर फंड न केवल आपके निवेश को सुरक्षित रखने की कोशिश करते हैं, बल्कि बदलती दरों का लाभ उठाकर बेहतर रिटर्न देने की क्षमता भी रखते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि ये फंड कैसे काम करते हैं और इनमें टैक्स के क्या नियम हैं।



बाजार में ब्याज दरें कभी ऊपर जाती हैं तो कभी नीचे। फ्लोटर फंड ऐसे निवेशकों के लिए एक खास विकल्प हैं जो इन बदलावों का फायदा उठाना चाहते हैं। ये फंड अपना ज्यादातर पैसा उन जगहों पर लगाते हैं जहां ब्याज दरें स्थिर नहीं रहतीं।


फ्लोटर फंड एक तरह के ओपन-एंडेड डेट म्यूचुअल फंड हैं। सेबी के नियमों के अनुसार इन फंड्स को अपना कम से कम 65 फीसदी पैसा फ्लोटिंग रेट वाले निवेशों में लगाना होता है। फ्लोटिंग रेट का मतलब है कि इन पर मिलने वाला ब्याज समय-समय पर बदलता रहता है। ये फंड कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं।


कैसे काम करता है : इन फंड्स का ब्याज दर बाहरी बेंचमार्क से जुड़ा होता है। इसमें अक्सर आरबीआई के रेपो रेट या ट्रेजरी बिल यील्ड का इस्तेमाल किया जाता है। जब बाजार में ब्याज दरें बढ़ती हैं तो इन फंड्स से मिलने वाला रिटर्न भी बढ़ जाता है। फंड मैनेजर कई बार स्वैप या वायदा का इस्तेमाल भी करते हैं। वे इसके जरिए फिक्स्ड रेट वाले बॉन्ड्स को फ्लोटिंग रेट में बदल देते हैं। इससे निवेशकों को ब्याज दरें बढ़ने पर नुकसान के बजाय फायदा होने की संभावना रहती है।


जनवरी 2026 का बाजार और फ्लोटर फंड : जनवरी 2026 में भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट 5.25% पर है। दिसंबर 2025 की मीटिंग में इसमें 0.25 फीसदी की कटौती की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि अब ब्याज दरों में बड़ी कटौती का दौर खत्म हो रहा है। ऐसे समय में फ्लोटर फंड निवेशकों के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं। वर्तमान में तीन साल के एएए रेटिंग वाले पीएसयू बॉन्ड्स करीब 6.91 फीसदी का रिटर्न दे रहे हैं।


किसे करना चाहिए निवेश?

ये फंड उन लोगों के लिए बेहतर हैं जो एक से तीन साल के लिए निवेश करना चाहते हैं। अगर आप फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) से थोड़े बेहतर रिटर्न की उम्मीद रखते हैं तो ये आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकते हैं। ये फंड उन निवेशकों को सुरक्षा देते हैं जो ब्याज दरों के बढ़ने से होने वाले नुकसान से बचना चाहते हैं। हालांकि, इनमें निवेश करने से पहले जोखिम और फंड की गुणवत्ता की जांच जरूर करनी चाहिए।


टैक्स के नियमों को समझना जरूरी

फ्लोटर फंड पर टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि आपने निवेश कब किया था। अगर एक अप्रैल, 2023 के बाद निवेश किया है तो होने वाले मुनाफे पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा। चाहे आपने पैसा कितने भी समय के लिए लगाया हो। उससे पहले के पुराने निवेश पर नियम थोड़े अलग हैं। अगर पुरानी यूनिट्स को 24 महीने से ज्यादा समय तक रखा जाए तो उन पर 12.5% का टैक्स लगता है।


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