ज्ञापन में शिक्षकों ने वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को थोपे जाने का विरोध किया। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में संघ ने मांग उठाई कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले और आरटीई अधिनियम की धारा 23 में वर्ष 2017 में किए गए संशोधनों को उन शिक्षकों पर लागू न किया जाए जिनकी नियुक्ति इन नियमों के आने से पहले हो चुकी है।
महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष प्रवेश कुमारी यादव ने कहा कि शिक्षकों का मानसिक उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेताया कि इन विसंगतियों के कारण उत्तर प्रदेश के लगभग दो लाख और देशभर के 20 लाख से अधिक शिक्षकों का भविष्य दांव पर लगा है, इससे शिक्षक समुदाय में आक्रोश है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मांडलिक मंत्री मुकेश सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष शिवस्वरूप शर्मा, जिला मंत्री रोहित सिंह, महिला शिक्षक संघ की महामंत्री राखी सक्सेना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगीता मित्तल, नीतू अग्रवाल आदि मौजूद रहीं।

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