नई दिल्ली : देशभर के केंद्रीय, राज्य और मानद विश्वविद्यालयों के अध्यापन कार्य करने वाले अतिथि शिक्षक मौजूदा वेतन से खुश नहीं हैं।
इस मुद्दे पर ऑल इंडिया यूनिवर्सिटीज एंड कॉलेजिज एससी, एसटी, ओबीसी टीचर्स एसोसिएशन ने एमएचआरडी मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और यूजीसी के चेयरमैन प्रो. डीपी सिंह को पत्र लिखा है। पत्र में एसोसिएशनों ने देशभर के केंद्रीय, राज्य और मानद विश्वविद्यालयों में अध्यापन कार्य करने वाले अतिथि शिक्षकों(गेस्ट टीचर्स) का वेतन भी स्थायी शिक्षकों की तरह 7वें वेतन आयोग के अनुसार दिए जाने की मांग की है।
साथ ही स्थायी शिक्षकों की तरह इन्हें भी टीए/डीए और मेडिकल सुविधा दी जाए।
एमएचआरडी और यूजीसी को भेजे गए पत्र में लिखा है कि 7वें वेतन आयोग के मद्देनजर जिस तरह से स्थायी एवं तदर्थ शिक्षकों के वेतन में वृद्धि हुई उसके मुकाबले अब तक अतिथि शिक्षकों (गेस्ट टीचर्स) का मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। अतिथि शिक्षकों को कोई टीए/डीए नहीं मिलता है। इसलिए अधिकतम राशि को बढ़ाया जाए। अकेले डीयू के कॉलेजों में 2000 से अधिक विभिन्न सब्जेक्ट्स में गेस्ट टीचर्स पढ़ा रहे हैं। देश में 813 विश्वविद्यालय और लगभग 42338 हजार कॉलेजिज है जिसमें लाखों गेस्ट टीचर्स अलग-अलग विभागों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व डीयू एसी सदस्य प्रो.हंसराज ने बताया है कि विश्वविद्यालयों के विभागों व कॉलेजों में किसी शिक्षक के छुट्टी जाने पर या विभाग में नया पद सृजित होने पर आजकल तदर्थ शिक्षक न नियुक्त कर अतिथि शिक्षक रखे जाते हैं।कुल मिलाकर लाखों अतिथि शिक्षक विभिन्न विश्वविद्यालयों में आज भी उन्हें प्रति लेक्चर 1000 रुपए के हिसाब से पढ़ाने पर दिया जा रहा है, जिन्हें दो से अधिक लेक्चर प्रति दिन नही दिए जा सकते और 25000 रुपए से अधिक महीने में नही दिए जा सकते दे चाहे उसने उससे अधिक कक्षाएं ली हो।
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