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BTC कॉलेजों पर खतरा: ग्रेडिंग कॉलेजों की तलवार प्रवक्ताओं पर

इलाहाबाद : पहले प्रशिक्षुओं की मेधा के आधार पर कॉलेज की रैंक तय करने का आदेश हुआ। अब प्रवक्ताओं की पहचान रिपोर्ट मांगी गई है। प्रदेश भर में शिक्षक तैयार करने की फैक्टरी में तब्दील हो रहे निजी बीटीसी
कॉलेजों पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है।
शिक्षा देने के नाम खुले कॉलेजों में तालाबंदी का खतरा मंडरा है, इसीलिए संस्थान प्रबंधन जवाब देने से बच रहे हैं। संस्थान प्रशिक्षुओं या प्रवक्ता में से किसी की भी रिपोर्ट देने पर खुद सवालों के घेरे में आ रहे हैं। सख्ती के कारण निजी कॉलेजों में दाखिला लेकर गायब अभ्यर्थी भी अब परेशान हैं।
प्रदेश में बेसिक टीचर्स टेनिंग यानी बीटीसी का पाठ्यक्रम पहले जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट में ही चल रहा था। सत्र 2012-13 से निजी कॉलेजों को भी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम की संबद्धता दी गई। महज चार साल में ही 1422 निजी कॉलेज खुल गए हैं, लेकिन वहां पर पठन-पाठन का स्तर लगातार गिर रहा है। इसकी वजह दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों को कुछ ‘शर्तो’ के बाद कॉलेज न आने की छूट देना और एक ही प्रवक्ता का कई कॉलेजों में पंजीकृत होना है। ऐसे प्रवक्ता कई जगहों से भुगतान ले रहे हैं, लेकिन पढ़ाने कहीं नहीं जाते। इस पर अंकुश लगाने के लिए पहले बीटीसी का पाठ्यक्रम बदला गया, लेकिन सुधार नहीं हुआ। शिक्षक पात्रता परीक्षा के साथ ही बीटीसी की सेमेस्टर परीक्षा का रिजल्ट लगातार गिर रहा है। ऐसे में एससीईआरटी ने टीईटी परीक्षा के आधार पर कॉलेजों की ग्रेडिंग का आदेश दिया।
एससीईआरटी के निदेशक डॉ. सर्वेद्र विक्रम बहादुर सिंह ने ग्रेडिंग के लिए सबसे पहले 19 अगस्त को आदेश जारी किया। इसके बाद 12 सितंबर, 28 सितंबर और 19 अक्टूबर को अनुस्मारक जारी हुआ कि ग्रेडिंग की सूचना वेबसाइट पर अपलोड की जाए, लेकिन डायट से लेकर कालेज प्रबंधन तक लगातार अनदेखी कर रहे हैं।
सात नवंबर को फिर आदेश जारी हुआ है कि तय प्रोफार्मा पर सारी सूचनाएं देकर 12 दिसंबर तक परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव की वेबसाइट पर ग्रेडिंग प्रदर्शित करें। परीक्षा नियामक ने भी इस संबंध में निर्देश दिए हैं, लेकिन हर कोई जवाब देने से बच रहा है। अब प्रवक्ताओं का आइडी प्रूफ मांगकर शिकंजा और कसा गया है, लेकिन जवाब देने की प्रक्रिया में कोई सुधार नहीं हुआ है।
रजिस्ट्रार नवल किशोर ने बताया कि डायट प्राचार्यो को सचिव की ओर से सख्त निर्देश जारी हुए हैं कि सूचनाएं अपलोड करें, अन्यथा ऐसे कालेजों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।

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