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सबकी निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर , शिक्षामित्र और टीईटी पास युवा आमने-सामने

राज्य मुख्यालय ।  एक तरफ शिक्षामित्र अपना समायोजन बचाने में लगे हैं। दूसरी तरफ, बीटीसी व बीएड टीईटी पास अभ्यर्थी शिक्षक पद पर अपना दावा ठोक रहे हैं। ऐसे में सबकी निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
सोमवार को शिक्षामित्रों द्वारा दी गई 3 दिनों की मियाद खत्म हो रही है। बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षामित्रों के प्रतिनिधियों के साथ सोमवार को बैठक करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि 1.70 लाख शिक्षामित्रों को लेकर सरकार निर्णय ले चुकी है लेकिन शिक्षामित्र इससे सहमत नहीं है।

बीते दिनों उन्होंने राजधानी में बड़ा प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री से मिलने के बाद ही इसे खत्म किया। राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये मानदेय दिए जाने का निर्णय लिया है। वहीं 2.5 अंक प्रतिवर्ष सेवा संबंधी भारांक यानी वेटेज दिया जाएगा। शिक्षक नियमावली में शिक्षामित्रों से संबंधित संशोधन किए जाएंगे, अक्टूबर में टीईटी होगा और दिसम्बर में भर्ती करने की योजना है। लेकिन शिक्षामित्र 10 हजार रुपये मानदेय पर काम करने को तैयार नहीं है।

आपत्तियां आने लगीं सामने: बीटीसी ट्रेनी वेलफेयर एसोसिएशन ने भारांक पर आपत्ति जताई है कि हरियाणा व पंजाब हाईकोर्ट ने वेटेज के एक ऐसे ही मामले में 24 अंकों के भारांक को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा 24 अंकों का भारांक (वेटेज) देकर संविदा शिक्षकों को वरीयता देना अवैध रूप से नियमितीकरण की प्रकिया है लिहाजा इसे रद्द किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस निर्णय पर सहमति जताते हुए इसके खिलाफ दायर एसएलपी को खारिज कर दिया। यूपी सरकार ने सेवा के 2.5 अंक प्रतिवर्ष और अधिकतम 25 अंक का वेटेज देने का निर्णय लिया है।

बीटीसी एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इसका संज्ञान नहीं लिया तो वे सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। वहीं टीईटी संघर्ष मोर्चा ने शासन स्तर पर अपर मुख्य सचिव तक को ज्ञापन सौंपा है कि वे 10 हजार में स्कूलों में पढ़ाने के लिए तैयार हैं। उनकी आपत्ति है कि सरकार सु्प्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रही है। शिक्षामित्र स्कूलों में नहीं जा रहे हैं ऐसे में सरकार उन्हें मौका दे। यदि सरकार ने शिक्षामित्रों को बेजा लाभ देने की कोशिश की तो वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

शिक्षामित्र समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित आश्रम पद्धति के स्कूली शिक्षकों की तरह मानदेय की मांग कर रहे हैं। इन स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षक संविदा पर तैनात हैं और 27 हजार रुपये 11 महीने 29 दिन का मानदेय दिया जाता है। इस तर्ज पर परिषद में भी शिक्षकों के वेतन के समकक्ष उन्हें भी मानदेय दिया जाए।

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