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इस प्राइमरी स्कूल की ऐसी गंदी तस्वीर आई सामने, शिक्षा विभाग हो रहा शर्मसार

औरैया. जनपद के एरवाकटरा विकास खंड के अंतर्गत पड़ने वाली ग्राम पंचायत दोवामाफी के प्राथमिक विद्यालय की हालत देखें तो आपको सिर्फ कूड़ों का ढेर एवं टूटी-फूटी बिल्डिंग ही दिखाई देगी।
शिक्षा के नाम पर सरकार को प्रतिवर्ष के हिसाब से लाखों का चूना लगा रहे अध्यापक, शिक्षामित्र एवं आंगनबाड़ी कार्यकत्री सभी की सभी सरकार को चूना लगाने में लगे हुए हैं। मिड डे मील का हाल तो पूछिए ही मत, यहां एक किलो आलू और कुछ टमाटरों से 90 बच्चों के लिए खाना बनाया जाता है। क्वॉलिटी भी ऐसी कि जिसे शायद आप देखना भी न चाहें।
मौके पर मौजूद प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक सुनील कुमार ने बताया कि प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षामित्र राजकुमार कभी भी स्कूल में पढ़ाने नहीं आते हैं, जिसकी शिकायत कई बार लिखित तथा मौखिक रूप से एसडीओ एवं बीआरसी पर की, मगर अधिकारियों की कान पर जूं तक नही रेंगी और न ही कभी शिक्षामित्र के खिलाफ कोई भी कार्यवाही की। यहां तक कि अध्यापक के द्वारा सम्बंधित अधिकारियों पर रिश्वत लेने तक का आरोप लगाया गया। मौके पर मौजूद प्रधानाचार्य राजीव कुमार ने बताया कि शिक्षामित्र राजकुमार के न आने के कारण बहुत ही परेशानियों का सामना करना पड़ता है। तथा स्कूल में पंजीकृत लगभग नब्बे बच्चों को एक अध्यापक कहां तक देखे, जबकि मुझे तो विद्यालय संबंधी बहुत ही कार्य होते हैं, लेकिन कई एक प्रयास करने के बाबजूद कभी भी शिक्षामित्र स्कूल नहीं आता है, लेकिन मानदेय पूरा उठाता है।
एक माह में सिर्फ चार दिन खुलता है आंगनबाड़ी केंद्र
जनपद के एरवाकटरा विकास खंड के अंतर्गत पड़ने वाले ग्राम दोवामाफी का आंगनबाड़ी केंद्र में लगभग सत्तर बच्चे पंजीकृत होने के बाबजूद भी मात्र एक माह में चार दिन खुलता है। एक तरफ जहां शासन के द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को बच्चों के लिए पंजीरी, बिस्किट तथा खाना तक की व्यववस्था करती है, वहीं सरकार की तरफ से नियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकत्री मौज काट रही हैं। सवाल ये उठता है कि आखिर ग्राम प्रधान इस ओर बिल्कुल ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं, जबकि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को खाने का पैसा ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर के बिना नहीं निकलता है।
साढ़े ग्यारह बजे के करीब पहुंची सहायिका विमलेश कुमारी से पूछने पर वे ये भी नहीं बता पाईं कि आंगनबाड़ी केंद्र पर कितने बच्चे पंजीकृत हैं। खाने के बारे में पूछने पर बताया कि खाने का पैसा तो ऊपर से ही नहीं आता। कुछ इस प्रकार हो रहा है बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ जिसे करने वाले कोई औऱ नहीं खुद ही सरकार के कर्मचारियों के द्वारा नियुक्त किये गए चंद लोग जो सरकार को चूना लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के नाम क्रमशः पूजा और गीता देवी हैं। पूजा ऐरवा कटरा में रहती है तथा गीता देवी बिधूना में रहती हैं।

एमडीएम का हाल : नब्बे बच्चों के लिए एक किलो में बनती है सब्जी
सरकार भले ही एमडीएम को लेकर ग्रामीण बच्चों को सेहतमंद खाना खिलाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करती हो, लेकिन बच्चों तक पहुंचता है इतना बुरा खाना कि खुद अध्यापक भी न खाएं। प्राथमिक विद्यालय दोवामाफी में तैनात रसोईया तीन हैं, मगर नब्बे बच्चों के लिए सामग्री एक किलो आलू गिनती के पांच टमाटर तथा एक फूलगोभी से बन रही सब्जी। आटे का नाम नहीं चावल वो भी बिना साफ किया हुआ टूटा हुआ चावल बन रहा है।

सिर्फ चुनाव के समय तक लगता है गेट
विकास खंड के अंतर्गत पड़ने वाले प्राथमिक विद्यालय का मेनगेट टूटा पड़ा है। मौके पर मौजूद प्रधानाचार्य राजीव कुमार ने बताया कि कुछ दबंग लोगों के उकसाने पर गांव के बलवीर बाथम, उदयवीर बाथम एवं जयवीर बाथम विद्यालय का मेनगेट तोड़ देते है। मना करने पर वह झगड़ा करने को आमादा हो जाते हैं, जिसकी शिकायत कईं बार ग्राम प्रधान से की गई। मगर इसका निस्तारण आज तक नहीं हो सका, जिससे विद्यालय में गंदगी रहती है।
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