मुरादाबाद: वर्ष 2010 से 2016 तक हुई शिक्षक भर्ती की जाच अब एक बार फिर
से होगी। इन सात सालों में जिले में 1571 रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती
अलग-अलग समय में हुई हैं। इस अवधि में अपने जिले में भी 1207 शिक्षकों की
भर्ती हो चुकी है। 2016-16 तक की भर्ती में जिन मामलों को लेकर शासन ने
संज्ञान लिया है इससे अपने जिले में भी फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र व शिक्षक
अर्हता पूरी नहीं करने के बावजूद भी भर्ती करने की आशका है। इसका उदाहरण
वर्ष 2012-13 में हुई शिक्षक भर्ती है। इसमें फर्जी प्रमाण पत्र लगाने पर
सात शिक्षक बर्खास्त हो चुके हैं।
ये है पूरा मामला
हाल ही में मुख्यमंत्री के पोर्टल पर वर्ष 2015-2016 में शिक्षक भर्ती में
भी कुछ शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी तरीके से होने का मामला सामने आ चुका
है। इसमें 40 शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी तरीके से किए जाने की जाच लगभग
पूरी हो चुकी है और इनकी नियुक्ति करने वाली चयन समिति को नोटिस दिया गया
है। ढाई साल पहले एक अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक
भर्ती में गड़बड़ी को लेकर पूर्व बीएसए मुन्ने अली निलंबित हो चुके हैं।
प्रदेश में वर्ष 2010 से 2016 तक छह बार शिक्षक भर्ती हो चुकी हैं। इसमें
2011 से 2015 तक अलग-अलग चरणों में 72,000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्त्रिया
पूरी हुई। वर्ष 2016-17 में 15000 शिक्षकों की भर्ती हुई, जिसमें हाल में
हुई जाच में 40 शिक्षकों की नियुक्ति फर्जी रूप से किए जाने का मामला
सुर्खियों में आ चुका है। इसके अलावा 2015 में ही प्रदेश में 2900 शिक्षक व
विज्ञान वर्ग के लिए 16000 शिक्षकों की भर्ती हुई थी।
40 शिक्षकों की भर्ती पर लटकी तलवार
हाल में हुई शिक्षक भर्ती में 40 शिक्षकों की भर्ती पर तलवार लटकी हुई है।
एसडीएम शैलेंद्र कुमार सिंह व पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी एमपी सिंह जाच
कर चुके हैं, जिसकी पुन: जाच डीएम ने बीएसए को सौंपी थी। बीएसए ने भी जाच
रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें 40 शिक्षकों की जाच गलत तरीके से होने पर चयन
समिति को नोटिस दिया गया है। इसमें पूर्व बीएसए काता प्रसाद की भूमिका भी
संदिग्ध है। चयन समिति में डायट प्राचार्य भी होते हैं, जिससे शिक्षक भर्ती
घोटाले में कई पर गाज भी गिर सकती है।
वर्ष 2010 से अब तक शिक्षक भर्ती घोटाले
1-2012-13 में डॉ.सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की फर्जी डिग्री
लगाकर शिक्षक की नियुक्ति प्राप्त करने वाले सात शिक्षक बर्खास्त हुए थे।
2- वर्ष 2016-17 में 40 शिक्षकों ने परिणाम आने से पहले ही वेबसाइट पर
फर्जी अंक भरकर आवेदन किए और नौकरी हासिल की, जिनकी कार्रवाई जारी।
3-एक शिक्षक ने दसवीं व 12वीं की परीक्षा दो अलग-अलग संस्थान से एक ही वर्ष
में उत्तीर्ण की और आवेदन में कम नंबर वाली अंकतालिका लगाई जबकि काउंसलिंग
के समय अंक तालिका दूसरी प्रस्तुत की गई।
4-2016 में एक महिला को 51 साल की उम्र में अर्हता के विपरीत जाकर शिक्षक
पद पर नियुक्ति दी।
5-एक महिला शिक्षिका ने स्नातक की डिग्री दो अलग-अलग विश्वविद्यालय से ली
और आवेदन करते समय कम अंक वाली अंकतालिका व काउंसिलिंग के समय ज्यादा अंक
वाली अंक तालिका लगाई।
अभी चल रही है जाच : योगेंद्र कुमार
2015 में हुई शिक्षक भर्ती की जाच अभी चल रही है। शासन ने 2010 से 2016 तक
में हुई शिक्षकों की जाच के आदेश दिए हैं। इस संबंध में कोई आदेश प्राप्त
नहीं हुआ है। आदेश मिलते ही पालन कराया जाएगा।
-योगेंद्र कुमार, बीएसए।
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