जागरण संवाददाता, बागपत: परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई को छोड़कर बाकी
सब कुछ है। यकीन नहीं हो रहा है तो किसी स्कूल में घूम आइए..जहां शिक्षक
बतियाते मिलेंगे और बच्चे उछल कूद करते।
बाकी कसर उन शिक्षकों ने पूरी कर
दी है, जो महीनों व सालों तक स्कूल आने की जहमत नहीं उठाते। बच्चे भी कम
नहीं हैं। मन करता है तो स्कूल चले आते हैं, वरना धमाचौकड़ी मचाने को गांव
की गलियां हैं न..।
एक साल से नहीं
आए गुरुजी
उच्च प्राथमिक स्कूल अहैड़ा में 115 में 25 बच्चे नदारद थे। चार
शिक्षकों में एक शिक्षक एक साल से स्कूल नहीं आईं। अफसर उनके खिलाफ
कार्रवाई करने
से बच रहे हैं। इंचार्ज हेडमास्टर मोहम्मद सालिम कहते हैं कि हमने
शिक्षिका के नदारद रहने की रिपोर्ट अधिकारियों को पहले ही भेज दी थी।
शिक्षण की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।
यहां दो साल की
छुट्टी पर हैं
प्राथमिक स्कूल निवाड़ा में 470 बच्चे पढ़ाने को कागजों में 11 शिक्षक
नियुक्त हैं। इनमें तीन शिक्षक दो-दो साल के अवैतनिक अवकाश तथा दो टीचर
करीब तीन महीने की छुट्टी पर हैं। एक शिक्षिका बीमार है। बाकी पांच
शिक्षिकाओं के जिम्म्मे 100-100 बच्चे पढ़ाने का जिम्मा है। अफसर दूसरे
शिक्षक भेजने को तैयार नहीं हैं।
403 में 346 बच्चे नदारद
प्राथमिक स्कूल खुब्बीपुर निवाड़ा में 403 में 346 बच्चे नदारद मिले।
सात शिक्षिकाओं में एक मेडिकल तथा दो बाल्य देखभाल अवकाश पर हैं। हेडमास्टर
विभा कहती हैं कि कुछ बच्चे ईद मनाने के कारण स्कूल नहीं आए। प्राथमिक
स्कूल पाली में 229 में 96 बच्चे गैरहाजिर मिले। चार में दो शिक्षक मेडिकल
पर हैं।
¨हदी नहीं पढ़ पाए बच्चे
जिला मुख्यालय बागपत के प्राथमिक स्कूल नंबर एक में 671 में 443 बच्चे
नदारद थे। हालांकि यहां कई बच्चों ने पूछे गए सवालों का जवाब फटाफट दिया।
कई बच्चों को पूरी किताब तक नहीं मिली है। इसी परिसर में उच्च प्राथमिक
स्कूल के कक्षा छह के सचिन तथा सौरभ ¨हदी के सरल वाक्य तक नहीं पढ़ पाए
हैं।
नदारद रहते हैं 25 हजार बच्चे
बागपत में 674 परिषदीय स्कूलों में 66 हजार बच्चे नामांकित हैं। रोज 38
से 40 हजार बच्चों के मिड डे मील खाने का औसत है। साफ है कि 25 से 28
हजार तक बच्चे स्कूलों से नदारद रहते हैं। अधिकांश अभिभावकों का
परिषदीय स्कूलों पर भरोसा नहीं। परिषदीय स्कूलों के मुकाबले पब्लिक स्कूलों
में दोगुने यानी सवा लाख बच्चे पढ़ते हैं।
इन्होंने कहा..
शिक्षकों की कहीं कमी नहीं रहेगी। बच्चों का नामांकन, उपस्थिति और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार की सख्त हिदायत शिक्षकों को दी है।
-चंद्रकेश ¨सह, बीएसए।
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