लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने चल-अचल संपत्ति का विवरण निर्धारित समय पर न देने वाले राज्य कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। 31 जनवरी 2026 तक संपत्तियों का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज न
कराने वाले 47,816 कर्मचारियों का फरवरी माह का वेतन रोक दिया गया है, साथ ही उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए हैं।🔹 मुख्य सचिव का सख्त शासनादेश
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने इस संबंध में सोमवार को शासनादेश जारी करते हुए सभी विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश भेजे हैं।
आदेश के अनुसार:
-
वर्ष 2025 में अर्जित चल-अचल संपत्तियों का विवरण
-
प्रत्येक राज्य कर्मचारी को
👉 31 जनवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन देना था
निर्धारित समय सीमा के बाद जानकारी न देने वालों पर कार्रवाई तय की गई थी।
🔹 कितने कर्मचारी नियमों का पालन नहीं कर पाए?
प्रदेश में वर्तमान में:
-
कुल राज्य कर्मचारी: 8,82,723
-
संपत्ति विवरण न देने वाले: 47,816 कर्मचारी
इन कर्मचारियों ने मानव संपदा पोर्टल पर तय तिथि तक संपत्ति का ब्योरा दर्ज नहीं किया।
🔹 DDO पर भी गिरेगी गाज
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि:
👉 यदि किसी कर्मचारी का संपत्ति विवरण न देने के बावजूद वेतन जारी किया गया,
तो संबंधित आहरण वितरण अधिकारी (DDO) की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
-
ऐसे मामलों की सूची एक सप्ताह के भीतर विभागाध्यक्षों को शासन को भेजनी होगी
-
दोषी पाए जाने पर DDO के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी
🔹 कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी तय
जो कर्मचारी:
❌ तय अवधि तक संपत्ति विवरण नहीं देंगे
❌ या जानबूझकर जानकारी छिपाएंगे
उनके खिलाफ:
✔️ अनुशासनात्मक कार्रवाई
✔️ सेवा नियमों के तहत दंडात्मक कदम
उठाए जाएंगे।
🔹 मानव संपदा पोर्टल पर पारदर्शिता का प्रयास
सरकार का कहना है कि:
-
संपत्ति विवरण अनिवार्य करने का उद्देश्य
👉 भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
👉 प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाना
है। नियमों का उल्लंघन किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
🔹 निष्कर्ष
राज्य सरकार का यह फैसला:
-
कर्मचारियों में जवाबदेही तय करने
-
संपत्ति विवरण नियमों को सख्ती से लागू करने
-
और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई
की दिशा में बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।