पडरौना। जिले के परिषदीय स्कूलों में तैनात दिव्यांग शिक्षकों के दिव्यांग और शैक्षिक प्रमाण-पत्रों की गहन जांच कराने का आदेश जारी किया गया है। यह कदम फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षकों की पहचान के उद्देश्य से उठाया गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग में लगातार सामने आ रहे फर्जीवाड़े के मामलों को देखते हुए अब विभाग ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने का संकेत दिया है। जांच में यदि कोई शिक्षक अपात्र पाया गया या प्रमाण-पत्र फर्जी निकला, तो उसकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी।
🔹 डीजी स्कूल शिक्षा के निर्देश के बाद कार्रवाई
डीजी स्कूल शिक्षा का पत्र मिलने के बाद बीएसए डॉ. रामजियावन मौर्य ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों के अनुसार:
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प्रत्येक ब्लॉक में तैनात दिव्यांग शिक्षकों की सूची तैयार की जाएगी
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निर्धारित समयावधि में
👉 शैक्षिक और दिव्यांग प्रमाण-पत्रों का सत्यापन कराया जाएगा -
सत्यापन रिपोर्ट बीएसए कार्यालय को भेजी जाएगी
🔹 संदिग्ध मामलों की होगी विस्तृत जांच
बीएसए ने स्पष्ट कहा है कि:
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दिव्यांग कोटे के अंतर्गत नौकरी पाने वाले शिक्षकों के
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शैक्षिक प्रमाण-पत्र
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दिव्यांग प्रमाण-पत्र
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की गहनता से छानबीन की जाए।
जिन शिक्षकों के दस्तावेज:
❌ संदिग्ध प्रतीत हों
❌ नियमों के अनुरूप न हों
उन मामलों की विस्तृत जांच कराई जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
🔹 फर्जीवाड़ा मिलने पर सख्त कार्रवाई
यदि जांच के दौरान:
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प्रमाण-पत्र फर्जी पाए जाते हैं
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या नियुक्ति में अनियमितता सामने आती है
तो संबंधित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग का कहना है कि यह अभियान ईमानदार और पात्र शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है।
🔹 दिव्यांग कोटे का सही लाभ सुनिश्चित करने की पहल
विभागीय अधिकारियों के अनुसार:
“दिव्यांग कोटे का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे, इसके लिए यह कदम बेहद जरूरी है।”
इस अभियान से:
✔️ फर्जी नियुक्तियों पर रोक लगेगी
✔️ पात्र दिव्यांग अभ्यर्थियों को न्याय मिलेगा
✔️ शिक्षा विभाग की पारदर्शिता बढ़ेगी
🔹 जिले में कितने दिव्यांग शिक्षक?
जिले में:
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कुल 2463 परिषदीय स्कूल (प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट)
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लगभग 10,000 शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक
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इनमें 52 दिव्यांग शिक्षक तैनात हैं
इन सभी 52 शिक्षकों के प्रमाण-पत्रों की जांच कराई जाएगी।
🔹 बीएसए का बयान
“परिषदीय स्कूलों में तैनात दिव्यांग शिक्षकों के शैक्षिक व दिव्यांग प्रमाण-पत्रों की जांच के आदेश सभी बीईओ को दे दिए गए हैं। प्रमाण-पत्र फर्जी पाए जाने पर संबंधित शिक्षक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”
— डॉ. रामजियावन मौर्य, बीएसए
🔹 निष्कर्ष
बेसिक शिक्षा विभाग का यह कदम:
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फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने
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दिव्यांग कोटे की पवित्रता बनाए रखने
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और ईमानदार शिक्षकों को संरक्षण देने
की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।