संघ के जिलाध्यक्ष आनंद कुमार पांडेय ने सांसद को बताया कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त परिषदीय शिक्षकों के लिए भी 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। संघ का कहना है कि इस निर्णय से 20 से 25 वर्षों से सेवाएं दे रहे अनुभवी शिक्षकों के सम्मान, आजीविका और भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। नौकरी जाने की आशंका से शिक्षक और उनके परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से अनुरोध किया कि इस विषय पर संसद में अध्यादेश अथवा आवश्यक विधायी संशोधन के माध्यम से ऐसे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित कराई जाए। इस पर सांसद ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह सदन में इस मुद्दे को उठाएंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला महामंत्री सुनील कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष शशिकांत गुप्त, जिला मीडिया प्रभारी बलराम पाठक, अजीत सिंह, राजकुमार जायसवाल, सरोज उपाध्याय, इरफान अली मंसूरी, अशोक पाल, धनंजय सिंह, हिमांशु तिवारी, संदीप दुबे आदि थे।
