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क्या माना जाए शिक्षामित्रों को , शासन से स्थिति स्पष्ट करने को कहा : 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती Latest News

लखनऊ : शिक्षामित्रों के समायोजन को हाई कोर्ट की ओर से अवैध ठहराने के बाद अब उनकी स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गोंडा और आगरा के जिलाधिकारियों ने शासन से पूछा है कि 12 सितंबर के बाद शिक्षामित्रों की स्थिति क्या रह गई है? उन्हें शिक्षक माना जाए या पहले की तरह शिक्षामित्र?
जिलाधिकारियों ने यह भी जानना चाहा है कि हाई कोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में शिक्षक के तौर पर शिक्षामित्रों की पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगायी जा सकती है या नहीं? बेसिक शिक्षा विभाग ने हाई कोर्ट के आदेश की रोशनी में शिक्षामित्रों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए न्याय विभाग से राय मांगी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ.डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में गठित हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ ने 12 सितंबर को अपना आदेश सुनाते हुए शिक्षामित्रों के समायोजन को अवैध ठहराया था। तब से ही बेसिक शिक्षा विभाग के अंदर और बाहर शिक्षामित्रों की स्थिति को लेकर अटकलें लगायी जा रही हैं। अधिकारी मान रहे हैं कि हाई कोर्ट के आदेश का पालन न करने से अवमानना का खतरा होगा। खासतौर पर इस वजह से भी क्योंकि हाईकोर्ट को इस मामले का फैसला करने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने ही दिया था। उधर हाई कोर्ट के आदेश से झटका खायी राज्य सरकार शिक्षामित्रों के बचाव में विकल्पों को टटोल रही है। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए विशेष याचिका दायर करने के सिलसिले में भी बेसिक शिक्षा विभाग ने न्याय विभाग से सलाह मांगी है। बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाने के लिए उन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट देने का अनुरोध भी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से करेगा।
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