आजमगढ़। वित्त मंत्री अरूण जेटली द्वारा गुरुवार को पेश किए गए आम बजट से
सबसे ज्यादा निराशा शिक्षकों और कर्मचारियों को हुई है। बजट में स्लैब न
बढ़ाए जाने से कर्मचारियों और शिक्षकों में निराशा व्याप्त हो गई है।
शिक्षक और कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार ने हमें स्लैब बढ़ाने का
आश्वासन दिया लेकिन बजट में इसमें कोई बढ़ोत्तरी नहीं की।
कर्मचारी
शिक्षक समंवय समिति के संयोजक गिरीश चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार का यह बजट
किसानों के लिए हितकर है लेकिन अगर यह लागू हो जाए तो। कर्मचारियों के लिए
यह बजट निराशाजनक है। क्योंकि इसमें स्लैब को नहीं बढ़ाया गया है। जबकि
सरकार ने कर्मचारियों से स्लैब को बढ़ाने का आश्वासन दिया था। महंगाई के
हिसाब से हमें भत्ता भी नहीं दिया गया है।
उप्र डीआरडीए इंप्लाईज यूनियन
के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार के इस बजट से
कर्मचारियों को कोई फायदा नहीं मिलने वाला है। जबकि कर्मचारियों ने इस बजट
से कई उम्मीदें लगा रखी थीं। लेकिन इस बजट ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी
फेर दिया। अगर इनकम टैक्स का दायरा बढ़कर पांच लाख हो जाता तो यह हमारे लिए
अच्छा होता। लेकिन सरकार ने इस ओर कुछ नहीं किया।
प्राथमिक शिक्षक संघ
के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यह बजट शिक्षक और कर्मचारी
विरोधी है। इसमें शिक्षकों और कर्मचारियों के बारे में कुछ नहीं है।
कांग्रेस के समय में जो स्लैब था वह आज भी है। जबकि हमने इसमें संशोधन की
आस लगाई थी। सातवां वेतन मान लागू होने के बाद भी इसमें कोई सुधार नहीं
हुआ। यह बजट हमारे लिए हानिकारक है। इस बजट से हम असंतुष्ट है।
उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ देवेंद्र सिंह गुट के अध्यक्ष शैलेष राय ने कहा
कि यह बजट किसानों और कमजोर वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
लेकिन इस बजट में कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए कुछ नहीं है। जिसके कारण
शिक्षकों और कर्मचारियों में निराशा है। सरकार ने इनकम टैक्स के दायरे में
भी बदलाव नहीं किया जबकि शिक्षक इसमें बदलाव की आस लगाए हुए थे।
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