पकौड़ा पर राजनीति और रोजगार का संकट
रोजगार को मौलिक अधिकार में शामिल करो-युवा मंच
केंद्र में 5 लाख खाली पदों को समाप्त करने की कार्रवाई वापस लो
कल 5 बजे सलोरी के शुक्ला मार्केट पहुंचे
बेरोजगारी ने आज देश में विस्फोटक हालात् पैदा कर दिये हैं। जब यूपीए-2 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन शुरू हुआ, तब देखते ही देखते कांग्रेस की चूलें हिलने लगी। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन बेहद जरूरी था, परन्तु उसमें बुनियादी कमजोरी यह थी कि कारपोरेट सेक्टर के भ्रष्टाचार व कारपोरेट जगत को अनाप-शनाप फायदा पहंुचाने वाली नीतियों एवं कानूनी-गैर कानूनी उपायों पर जोर ही नहीं था। दरअसल आज भ्रष्टाचार का मूल स्त्रोत कारपोरेट जगत को फायदा पहंुचाने वाली नीतियों से जुड़ा है। यही वजह रही भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से वैकल्पिक राजनीति नहीं खड़ी हो सकी और राष्ट्रीय स्तर पर विकल्प के अभाव में इसका फायदा भाजपा को मिला यह जगजाहिर है। अपने चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश की जनता खासकर युवाओं से बड़-बड़े किये गये वायदों का भी मोदी के सत्ता में पहंुचने में योगदान रहा।
भाजपा ने सत्ता में आने के बाद मनमोहन सरकार द्वारा जारी आर्थिक नीतियों जो बेशक वित्तीय पूंजी के हित में संचालित थी न सिर्फ जारी रखा बल्कि ज्यादा तेजी से लागू किया। नोटबंदी व जीएसटी इसी दिशा में उठाया गया कदम था। अब जब 4 साल बीत चुके हैं तब जनता को समझ में आने लगा है कि मोदी द्वारा किये गये वादे न सिर्फ झूठे थे बल्कि उनकी नीतियों से जनता को भारी तबाही उठानी पड़ रही है। बेतहासा मंहगाई, गहराता कृषि संकट, अनौपचारिक सेक्टर का चैपट किया जाना इन्हीं नीतियों का परिणाम है।
सब मिला जुला कर इन कारपोरेट वित्तीय पूंजी के हित में जबरन थोपी जा रही इन नीतियों का भयंकर परिणाम यह हुआ कि बेरोजगारी संकट ने विस्फोटक आयाम ग्रहण कर लिया है और इसके खिलाफ पूरे देश में युवा मुखर हो रहे हैं। इसी समय अखबारों में खबर छपी कि केंद्र सरकार 5 लाख खाली पदों को समाप्त करने जा रही है। इसने युवाओं के आक्रोश को बढ़ाने का काम किया। लेकिन इसी दरम्यान प्रधानमंत्री ने उच्च शिक्षित युवाओं को सलाह दे डाली कि पकोड़ा बेच कर 200 रू0 भी कमाया जा सकता है और सवाल पूंछ लिया कि क्या इसे रोजगार नहीं माना जायेगा। उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं को प्रधानमंत्री का यह वक्तव्य उनके साथ किया किया गया क्रूर मजाक व विश्वासघात लगा और पूरे देश से ही प्रतिक्रिया आयी। बात यहीं तक नहीं रूकी अमित शाह ने राज्यसभा में अपना पहला ऐतिहासित भाषण ही पकौड़ा मुद्दे पर देकर युवाओं का आहृान ही कर दिया कि कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता है। बेरोजगारी से अच्छा है कि पकौड़ा की दुकान युवा खोल ले।
जिस तरह भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौर में कांग्रेस के नेता अनाप-शनाप बयान दे रहे थे, उससे सीख न लेते हुए युवाओं व किसानों का उपहास भाजपा द्वारा किया जा रहा है। इससे इनकी भी उलटी गिनती शुरू हो गई है और रोजगार व अन्य जन मुद्दों के सवाल पर जन आंदोलन खास तौर पर युवा आंदोलन की संभावनायें पैदा हो गई हैं।
युवा मंच इलाहाबाद में लम्बे अरसे से रोजगार को मौलिक अधिकार बनाने व खाली सरकारी पदों को अविलम्ब भरने की मांग को लेकर अभियान चला रहा है। चयन प्रक्रिया बहाली के सफल आंदोलन के बाद शुक्ला मार्केट में 8 फरवरी को 5 बजे से पुनः आम सभा व खाली पदों को समाप्त करने की अधिसूचना की प्रतियां जला कर आंदोलन शुरू किया जा रहा है। आप कल इसमें जरूर शरीक हों
राजेश सचान
संयोजक, युवा मंच
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