पीसीएस अफसरों के चयन में व्यापक रूप से हुई गड़बड़ी और इसके काफी सुबूत
सीबीआइ के हाथ लगने पर प्रदेश में खलबली मच गई है। संदिग्ध चयनितों ही
नहीं, कई ‘बड़ों’ का भी इसमें हाथ होने का पता लगने पर सीबीआइ जांच
प्रभावित करने की कोशिश शुरू हो चुकी है।
यह ‘खेल’ तीन सेवानिवृत्त आइपीएस
अधिकारियों की सरपरस्ती में होने का संदेह है, इनमें दो अधिकारी पूर्व में
उप्र लोकसेवा आयोग के सदस्य रहे चुके हैं। इसकी भनक सीबीआइ को भी है।
लेकिन, जांच अधिकारियों का कहना है कि उनके कार्य में हस्तक्षेप करने वालों
पर भी जल्द ही शिकंजा कसा जाएगा।
आयोग से पांच साल में हुई सभी भर्तियों की सीबीआइ जांच हो रही है लेकिन,
जांच अधिकारियों का फोकस फिलहाल चार प्रतियोगी परीक्षाओं और उनमें भी
पीसीएस 2015 में हुए गलत चयन पर सबसे पहले है। पीसीएस 2015 में सीबीआइ के
निशाने पर करीब एक सौ चयनित हैं जिनके चयन में गड़बड़ी का संदेह है।
सीबीआइ को जानकारी मिली है कि इन चयनितों को आयोग में कार्यरत परिवारीजन,
रिश्तेदारी या अन्य करीबियों व प्रदेश में विभिन्न पुलिस और प्रशासनिक पदों
पर तैनात बड़े अफसरों से सगा संबंध होने का अनुचित लाभ दिया गया। जांच में
कई पूर्व अधिकारी भी फंस रहे हैं। ऐसे में सीबीआइ जांच को ही प्रभावित
करने की कोशिश शुरू हो गई है।
सूत्र बताते हैं कि तीन सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारियों व एनआरएचएम घोटाले
से संबंधित एक बड़े अधिकारी पूरी लॉबिंग में जुटे हैं। इनमें दो आइपीएस
अधिकारी पूर्व में आयोग के सदस्य रह चुके हैं, एक आइपीएस अधिकारी बड़े पद
पर रह चुके हैं। इनमें दो सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारियों के लखनऊ स्थित
आवास या उनके बताए किसी दूसरे स्थानों पर गोपनीय रणनीति बन रही है। एक
आइपीएस अधिकारी का 2016 तक आयोग में भी लगातार आना-जाना लगा रहता था और एक
अधिकारी तो आयोग की तरफ से हाईकोर्ट में रिट याचिका होने के दौरान भी
सक्रिय देखे गए।
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