सोनभद्र : ज्यादा से ज्यादा शौचालय बनाने और उसे उपयोग के लायक बनाकर
खुले में शौच रोकने के लिए शासन से लेकर प्रशासन तक पूरी टीम लगी हुई है।
30 सितंबर तक जिले को पूरी तरह से खुले में शौचमुक्त भी बना देने का लक्ष्य
है लेकिन, यह लक्ष्य कैसे पूरा होगा यह बड़ा सवाल है। यह सवाल इस लिए कि
अकेले परिषदीय स्कूलों में ही पढ़ने वाले करीब 82 हजार से अधिक बच्चे खुले
में शौच करते हैं। कारण कि ये बच्चे जिस स्कूल में पढ़ते हैं वहां का
शौचालय या तो उपयोगी नहीं है या फिर है ही नहीं। शिक्षा विभाग के सूत्रों
के मुताबिक जिले के 2458 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों
में करीब दो लाख तीस हजार से अधिक छात्र-छात्रएं पंजीकृत हैं। स्कूल समय
में शौच लगने पर इन्हें खुले में न जाना पड़े इसके लिए करीब-करीब सभी
स्कूलों में शौचालय का निर्माण कराया गया है। लेकिन जिले के 891 स्कूल ऐसे
हैं जहां का शौचालय उपयोग के लायक नहीं है। ऐसे में यहां पढ़ाई करने वाले
बच्चे या तो छुट्टी लेकर घर शौच के लिए जाते हैं या फिर खुले में ही शौच
करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक एक स्कूल में औसतन 93 बच्चों का नामांकन
है। इस हिसाब से करीब 82 हजार से अधिक बच्चे खुले में शौच करने के लिए विवश
हैं। जिले के सभी स्कूलों का शौचालय उपयोग के लायक बनाने के लिए शिक्षा
विभाग ने एक ठोस रणनीति बनायी है। उस रणनीति के तहत हर स्कूल में शौचालय का
निर्माण करना, शौचालय को उपयोगी बनाना, वहां पानी की व्यवस्था करना होगा।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक जिला प्रशासन से अनुरोध किया जाएगा कि जिस
गांव के स्कूल का शौचालय उपयोगी न हो उस गांव को तब तक ओडीएफ न घोषित किया
जाय, जब तक स्कूल का शौचालय उपयोगी न हो जाए।
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