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कैबिनेट के फैसले: सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने को बनेगा कानून साथ ही बेसिक शिक्षा के तीन अधिनियम रद्द

 लखनऊ : राज्य सरकार की सेवाओं के कार्मिकों की रिटायरमेंट वर्ष 2001 में 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करने के लिए बनाये गए उत्तर प्रदेश फंडामेंटल रूल 56 में संशोधन करते हुए सरकार इसे अधिनियम की शक्ल देने जा

रही है। इसके लिए यूपी फंडामेंटल रूल 56 (अमेंडमेंट एंड वैलिडेशन) एक्ट, 2021 के ड्राफ्ट को गुरुवार को कैबिनेट बाइसकरुलेशन मंजूरी दे दी गई। सरकार विधानमंडल के बजट सत्र में यह विधेयक ला सकती है। इससे सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने से जुड़े मुकदमों में सरकार को राहत मिलेगी।



राज्य की सेवाओं के कार्मिकों को अधिवर्षता आयु वर्ष 2001 में 58 से 60 वर्ष करने के लिए सरकार ने कार्यकारी आदेश जारी किया था। इसके लिए नियमावली में संशोधन बाद में किया गया। कोर्ट ने इस पर आपत्ति की थी कि नियमावली बैकडेट से नहीं बनाई जा सकती है। इसलिए सरकार ने अब नियमावली में संशोधन कर इसे अधिनियम का स्वरूप देने की तैयारी की है ताकि इसके तहत की गईं कार्यवाही को कानूनी जामा पहनाया जा सके।

पुनरीक्षित लागत मंजूर : कैबिनेट ने बलिया जिले के गांव चांदपुर के सामने घाघरा नदी पर सेतु पहुंच मार्ग, अतिरिक्त पहुंच मार्ग व सुरक्षात्मक कार्यों के लिए 224.98 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित लागत को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा फीरोजाबाद में शिकोहाबाद-भोगांव राज्य मार्ग को 21 किमी की लंबाई में फोर लेन में चौड़ा करने व सृदृढ़ीकरण के लिए पुनरीक्षित प्रस्ताव को प्रशासकीय व वित्तीय स्वीकृति दी है।

बेसिक शिक्षा के तीन अधिनियम रद्द : कैबिनेट ने बेसिक शिक्षा विभाग के तीन निष्प्रयोज्य अधिनियमों को निरस्त करने का फैसला किया है। इनमें उप्र प्राथमिक शिक्षा अधिनियम-1919, संयुक्त प्रांत प्राथमिक शिक्षा अधिनियम-1919 और संयुक्त प्रांत जिला परिषद प्राथमिक शिक्षा अधिनियम-1926 शामिल हैं। उप्र बेसिक शिक्षा अधिनियम-1972 के लागू होने के बाद तीनों विधेयक प्रचलन में नहीं हैं।

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