शिक्षामित्र मामले में SC ने लीक से हटकर की सुनवाई, लिया ये फैसला

शिक्षामित्रों का सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजन होगा या नहीं इस सस्पेंस से पर्दा हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने परंपरा से हटकर सुनवाई की. तीन तलाक मामले की सुनवाई शाम 4 बजे तक चलने के बाद शिक्षामित्रों पर सुनवाई 4:10 से शुरू की गई जो 6 बजे तक चली.

ये मामला उत्तर प्रदेश में 1,72,000 शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजित करने का है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त कर दिया था, जिसके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार व शिक्षामित्र सुप्रीमकोर्ट पहुंचे हैं. अभी तक 1,32,000 शिक्षामित्र सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजित हो चुके हैं. इस मामले में कानूनी मुद्दा योग्यता मानदंडों को लेकर फंसा है.

ऐसे में 1.72 लाख शिक्षकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो भी पक्षकार लिखित रूप से अपना पक्ष रखना चाहता है वह एक हफ्ते के भीतर रख सकते हैं. जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यूयू ललित की बेंच ने बुधवार को सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया.

अब शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट इस मसले पर सुनवाई करेगी कि अकेडमिक शिक्षक भर्ती पर सभी को टीईटी का कितना वेटेज मिलना चाहिए.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शिक्षामित्रों की ओर से सलमान खुर्शीद, अमित सिब्बल, नितेश गुप्ता, जयंत भूषण, आरएस सूरी सहित कई वरिष्ठ वकीलों ने अपनी ओर से दलीलें पेश की. शिक्षामित्रों की ओर से पेश अधिकतर वकीलों का कहना था कि शिक्षामित्रों वर्षों से काम कर रहे हैं. वे अधर में हैं. लिहाजा, मानवीय आधार पर सहायक शिक्षक के तौर परशिक्षामित्रों के समायोजन को जारी रखा जाए. साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई कि वह संविधान के अनुच्छेद-142 का इस्तेमाल कर शिक्षामित्रों को राहत प्रदान करें.
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