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अंतरजनपदीय तबादलों की सूची पर उठने लगे सवाल,पूर्वाचल के कई जिलों से अनियमितता की शिकायतें

इलाहाबाद : प्राथमिक शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों की सूची पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि सूची तैयार करने में कोई निश्चित मानदंड नहीं अपनाया गया है। शिक्षकों का कहना है कि दस दिन के भीतर यदि मामले को नहीं सुलझाया गया तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

सोमवार को दूरदराज से आए शिक्षकों का बेसिक शिक्षा परिषद पर जमावड़ा रहा। प्राथमिक शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों को लेकर एक बार फिर विवाद उठ खड़ा हुआ है। काफी जदेजहद के बाद जारी तबादले की सूची में करीब एक हजार ऐसे लोग शामिल हैं जिनका ग्रामीण क्षेत्र में कार्यकाल करीब एक ही साल रहा है। कानपुर देहात व गोरखपुर जिलें में ही अब तक ऐसे 147 मामले सामने आ चुके हैं। जबकि विभाग ने यह तय किया था कि ग्रामीण क्षेत्र में तीन या इससे अधिक सेवा कर चुके शिक्षक ही तबादले के पात्र होंगे। यही नहीं विभाग को 18 हजार शिक्षकों का तबादला करना था लेकिन करीब चार हजार शिक्षकों के तबादले को अभी भी अटका कर रखा गया है।

सीतापुर जिले में महज 17 शिक्षकों को तबादला हुआ है जबकि सौ से अधिक पात्र शिक्षकों ने आवेदन किया था। आगरा, मेरठ, गाजियाबाद समेत पश्चिमी यूपी के कई अन्य जिलों, वाराणसी, देवरिया, गाजीपुर, मीरजापुर आजमगढ़ समेत पूर्वाचल के कई जिलों से अनियमितता की शिकायतें मिल रही है।

प्राथमिक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन विशिष्ट बीटीसी उत्तर प्रदेश के प्रांतीय मंत्री विनय कुमार सिंह के मुताबिक तबादले को लेकर विभाग ने खुद के बनाए नियमों को तोड़ा है इससे शिक्षकों में रोष व्याप्त है। उनके मुताबिक विभाग चाहे तो अभी भी मामले को सुलटा सकता है इसके लिए दस दिन का समय दिया है। बावजूद इसके यदि शिक्षकों के साथ अन्याय होता तो माह के अंत में विधानभवन का घेराव व धरना प्रर्दशन किया जाएगा। इसके लिए रणनीति तैयार की जा रही है।
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