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ट्रेनिंग की याचिका पर विचार ही नहीं एकमत बनाकर करें पैरवी : हिमांशु राणा

बीटीसी वालों के लिए जिला-वरीयता शासन की तरफ से अभिशाप है और उधर एसएम को ट्रेनिंग नामक चीज़ जो 28004/2011 के पैर्विकारों की तरफ से तोहफेे में मिली है के लिए अति-फायदेमंद है ।
नियमावली में चाहे जो कोढ़ हो इसे ख़त्म कराकर ही भर्ती अंतिम रूप से चालू हो तो ज्यादा बेहतर है क्योंकि इसमें चयन का आधार पहले ही दोषपूर्ण 237/2013 खंडपीठ के निर्णय के विपरीत है तो आप स्वयं इसका भविष्य समझ सकते हैं बाकी गुणांक धारी जितने भी आज नौकरी पर हैं उन्हें समाजवादी पार्टी के साथ-साथ , माननीय उच्च न्यायालय और गुणांक के विपरीत पैर्विकारों का आभार व्यक्त करना चाहिये कुछ समय तक और स्वयं से एक अंतरिम प्रार्थना पत्र केवल वो भर्ती वाले जिनमे रिक्तियों से कम आवेदक थे लगाकर दया मांग सकते हैं ।
फिलहाल जिला-वरीयता से लाभान्वित शिक्षा मित्र के अगेंस्ट बीटीसी वाले खंडपीठ भी जाएं और अगर अब संभव हो तो टेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीमान खरे साहब से पूर्णपीठ के आदेश को रिव्यु में भी ले जाएं वैसे ये अब असंभव है क्योंकि पूर्णपीठ के आदेश में जो कोढ़ था वो माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चैलेंज है लेकिन मामले यानी आवेदन या चयन को subject to the petition करवा ही सकते हैं और वैसे भी शायद इतना ज्ञात तो नहीं है आदेश की 90 दिन की मियाद भी समाप्त हो चुकी है।
वरना जो रिजल्ट आएगा वो शायद 50% को नौकरी और 75% को बाहर करेगा कुछ जिलो में ।
बीएड के अगुवाकारों और पैर्विकारों से उम्मीद करता हूँ जो टीम आजतक लीगल वर्क में सशक्त रही हो उसकी ट्रेनिंग की याचिका पर विचार ही नहीं एकमत बनाकर पैरवी जरूर करें बाकी टीम तो अपना सर्वश्रेष्ठ देगी ही जैसे पूर्व में देती आई है।
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