Advertisement

यूपी में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम कटे, जानिए दावा-आपत्ति की पूरी प्रक्रिया और जिलावार स्थिति

 उत्तर प्रदेश में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्य में कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम कच्ची मतदाता सूची से हटाए गए हैं। निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि यह प्रक्रिया अंतिम नहीं है और 6 फरवरी तक पात्र नागरिक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।

इस पुनरीक्षण के दौरान जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो पाया, उनमें से 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजा जाएगा। राज्य के 75 जिलों में से 17 जिले ऐसे हैं, जहां 20 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम कटे हैं। सबसे अधिक 30.04 प्रतिशत नाम लखनऊ जिले में हटाए गए हैं, जबकि सबसे कम 12.42 प्रतिशत नाम महोबा जिले में कटे हैं।

नाम दोबारा जुड़वाने का मौका
ऐसे मतदाता जो बीएलओ से संपर्क में नहीं आ सके, जिनके गणना प्रपत्र समय पर जमा नहीं हो पाए या जो अस्थायी रूप से अनुपस्थित पाए गए, वे फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करा सकते हैं। इसके लिए घोषणापत्र और आवश्यक दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा। निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी मतदाता का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाया जाता है, तो उसे केवल एक ही स्थान पर रखा जाएगा।

गणना चरण के प्रमुख आंकड़े
4 नवंबर से 26 दिसंबर तक चले गणना चरण में 12.55 करोड़ मतदाताओं से प्रपत्र प्राप्त हुए, जो कुल का 81.30 प्रतिशत है। इस दौरान 46.23 लाख मृत मतदाताओं, 2.17 करोड़ स्थानांतरित या अनुपस्थित मतदाताओं और 25.47 लाख दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान की गई। पुनरीक्षण से पहले फ्रीज की गई मतदाता सूची में 15.44 करोड़ नाम दर्ज थे।

जिलावार स्थिति ने बढ़ाई चिंता
पश्चिमी और मध्य यूपी के कई जिलों में बड़ी संख्या में नाम कटने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज है। लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर नगर, प्रयागराज, मेरठ और बलरामपुर जैसे जिलों में 25 प्रतिशत से अधिक नाम हटाए गए हैं। वहीं बुंदेलखंड और कुछ पूर्वी जिलों में यह प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा।

मतदाताओं के लिए जरूरी सलाह
निर्वाचन आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे कच्ची मतदाता सूची में अपना नाम जरूर जांचें। यदि नाम कट गया है या कोई त्रुटि है तो समय रहते फॉर्म-6 के माध्यम से दावा या आपत्ति दर्ज कराएं। इससे अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल होने की संभावना बनी रहेगी और लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रहेंगे।

यह पूरा अभियान मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन साथ ही यह मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी पर भी निर्भर करता है।

UPTET news