लखनऊ से सामने आई एक अहम खबर के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार उच्च माध्यमिक और इंटर कॉलेजों के सहायक अध्यापकों के साथ-साथ बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेतर कर्मियों की वर्षों पुरानी मांग को जल्द पूरा करने जा रही है। सरकार ने पदनाम परिवर्तन को लेकर सैद्धान्तिक सहमति दे दी है, जिससे शिक्षा विभाग से जुड़े हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
सहायक अध्यापक कहलाएंगे सहायक प्रवक्ता
प्रस्ताव के अनुसार, उच्च माध्यमिक और इंटर कॉलेजों में कार्यरत सहायक अध्यापकों का पदनाम बदलकर अब ‘सहायक प्रवक्ता’ किया जाएगा। लंबे समय से शिक्षक संगठन इस मांग को उठा रहे थे, क्योंकि वर्तमान पदनाम उनकी शैक्षणिक योग्यता, कार्यदायित्व और गरिमा के अनुरूप नहीं माना जाता था। पदनाम परिवर्तन से शिक्षकों की सामाजिक और व्यावसायिक पहचान मजबूत होगी।
शिक्षणेतर कर्मियों के पदनाम भी बदलेंगे
सरकार सचिवालय की तर्ज पर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षणेतर कर्मियों के पदनाम में भी बदलाव करने जा रही है। इससे प्रशासनिक ढांचे में एकरूपता आएगी और कर्मचारियों को बेहतर पहचान मिलेगी। खास बात यह है कि इस बदलाव से सरकार या विभाग पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा।
पहले भी हो चुका है ऐसा बदलाव
वर्ष 2001 से 2007 के दौरान मायावती सरकार के कार्यकाल में सचिवालय के ग्रुप ‘सी’ कर्मियों के पदनाम बदले गए थे। उस समय प्रवर वर्ग सहायक का पदनाम बदलकर समीक्षाधिकारी किया गया था और उसे राजपत्रित दर्जा भी दिया गया था। उसी दौर में शिक्षकों ने भी पदनाम परिवर्तन की मांग उठाई थी, जो अब जाकर पूरी होने की दिशा में बढ़ रही है।
शिक्षा विभाग में सकारात्मक संदेश
यह फैसला शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों और शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाने वाला माना जा रहा है। पदनाम परिवर्तन भले ही वेतन या पदोन्नति से जुड़ा न हो, लेकिन इसका सीधा असर सम्मान, प्रोफेशनल पहचान और कार्य संतुष्टि पर पड़ता है।
सरकारी शिक्षक, सहायक अध्यापक, इंटर कॉलेज टीचर, शिक्षणेतर कर्मचारी, यूपी शिक्षा विभाग और सरकारी नौकरी से जुड़े हाई सर्च और हाई CPC RPM कीवर्ड्स के लिहाज से भी यह फैसला काफी अहम माना जा रहा है।
आने वाले समय में सरकार द्वारा इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किए जाने की संभावना है, जिस पर प्रदेशभर के शिक्षक और कर्मचारी संगठनों की नजर बनी हुई है।