उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के अवैध समायोजन को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायालय की शरण में पहुंच गया है। लंबे समय से शिक्षकों द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बाद अब इस पूरे मामले की कानूनी जांच शुरू हो गई है, जिससे शिक्षा विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है।
इस महत्वपूर्ण मामले की पैरवी सीनियर अधिवक्ता एचजीएस परिहार के चैम्बर से की जा रही है। उनके साथ कानूनी टीम में उनके भतीजे एडवोकेट अभिषेक सिंह और एडवोकेट कीर्ति वीर सिंह सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। अनुभवी और मजबूत कानूनी टीम के सामने आने से इस केस को लेकर शिक्षकों में नई उम्मीद जगी है।
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि समायोजन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई, महिला और दिव्यांग शिक्षकों के अधिकारों की अनदेखी हुई और विकल्प लिए बिना मनमाने तरीके से स्थानांतरण किए गए। इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर अदालत में चुनौती दी गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत में अवैध समायोजन की पुष्टि होती है तो सरकार और विभाग को समायोजन नीति में बदलाव करना पड़ सकता है। इसका असर प्रदेशभर में चल रही समायोजन प्रक्रिया और भविष्य की शिक्षक तैनाती पर भी पड़ सकता है।
यह मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं रह गया है, बल्कि एक संवेदनशील न्यायिक विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई और फैसले पर प्रदेश के हजारों शिक्षक और शिक्षा विभाग की नजर टिकी रहेगी।
