सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों और सड़कों पर घूम रहे पशुओं को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि देश में लोग सिर्फ कुत्तों के काटने से ही नहीं, बल्कि सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाले हादसों में भी अपनी जान गंवा रहे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सड़कों से आवारा कुत्तों और पशुओं को हटाने का आदेश दिया है।
यह अहम टिप्पणी जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजानिया की विशेष पीठ ने आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने साफ कहा कि यह केवल पशु कल्याण का नहीं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और जीवन के अधिकार से जुड़ा मामला है।
सड़कों पर आवारा पशु बन रहे जानलेवा खतरा
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर आवारा कुत्तों और पशुओं की मौजूदगी सीधे तौर पर सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। अदालत ने कहा कि सड़कें लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए होती हैं, न कि कुत्तों और पशुओं के लिए। इस स्थिति को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जस्टिस संदीप मेहता ने इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले 20 दिनों में राजस्थान हाईकोर्ट के दो न्यायाधीश भी आवारा पशुओं के कारण हुए सड़क हादसों का शिकार बन चुके हैं। यह घटना बताती है कि समस्या कितनी व्यापक और खतरनाक हो चुकी है।
नगर निकायों को नियम सख्ती से लागू करने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के नगर निगमों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया है कि आवारा कुत्तों और पशुओं से संबंधित नियमों को सख्ती से लागू किया जाए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि कानून और नियम कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर उनका प्रभाव दिखाई देना चाहिए।
यह आदेश शहरी प्रशासन, नगर निगम, पशु नियंत्रण विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी को सीधे तौर पर तय करता है। यह मामला अब केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था से जुड़ा अहम मुद्दा बन चुका है।
अदालतों और अस्पतालों में कुत्तों की मौजूदगी पर सवाल
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सवाल भी उठाया। अदालत ने पूछा कि क्या अदालतों, स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों जैसी संवेदनशील जगहों पर कुत्तों की मौजूदगी उचित है। जस्टिस मेहता ने कहा कि ये संस्थान हैं, कोई सड़क या खुला मैदान नहीं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी जगहों पर बच्चों, मरीजों, बुजुर्गों और आम नागरिकों को बिना किसी डर और बाधा के आना-जाना चाहिए। इन संस्थानों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी सुरक्षा और व्यवस्था दोनों के लिए खतरा बन सकती है।
जन सुरक्षा बनाम लापरवाही
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी और आदेश देशभर में आवारा कुत्तों और पशुओं की समस्या को लेकर एक अहम मोड़ माना जा रहा है। यह फैसला सड़क सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शहरी प्रशासन और नागरिक अधिकार जैसे हाई सर्च और हाई CPC RPM विषयों से जुड़ा हुआ है।
अब यह देखना अहम होगा कि नगर निकाय और राज्य सरकारें इस आदेश को कितनी गंभीरता से लागू करती हैं। यदि आदेशों का सही ढंग से पालन हुआ, तो इससे सड़क हादसों में कमी आने और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होने की उम्मीद की जा सकती है।