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फर्जीवाड़ा : अपात्र बन गए शिक्षक, अब जाएगी नौकरी

अमर उजाला, कानपुर एक साल पहले उर्दू शिक्षक के पद पर नौकरी पाए चार शिक्षकों की नियुक्ति रद्द होने की कगार पर है।  सभी ने नौकरी के लिए उस संस्थान का सर्टिफिकट लगाया था, जिसकी मान्यता ही नहीं है।
फर्जीवाड़े की शिकायत पर प्राथमिक जांच में इसका खुलासा हुआ। अब पैनल से जांच चल रही है जिसमें एडी बेसिक  भी हैं। भर्ती करने वाले तत्कालीन बीएसए भी जांच के घेरे में हैं।
एक साल पूर्व (वर्ष-2014-15) में तत्कालीन बीएसए राजेंद्र प्रसाद यादव ने जनपद में चार उर्दू शिक्षकों की भर्ती की थी। चयनित चारों शिक्षकों ने जो यूटीसी (उर्दू टीचर सर्टिफिकेट) लगाया था, वह इस पद के लिए यह मान्य नहीं है। इसके बावजूद इस तथ्य को छिपाते हुए चारों की नियुक्तियां कर दी गई। कमिश्नर से शिकायत के बाद बीएसए अंबरीश यादव ने जांच की तो सच्चाई सामने आई। अब पूरे मामले की जांच विभागीय आला अफसरों का पैनल कर रहा है। भर्ती प्रक्रिया के विज्ञापन जारी होने से लेकर नियुक्ति तक सभी कागजों की जांच की जा रही है। जल्द ही सभी नियुक्तियां रद होने के साथ ही वेतन की रिकवरी भी की जाएगी। एडी बेसिक फतेह बहादुर सिंह ने बताया कि प्राथमिक जांच में अपात्रों के चयन की बात सामने आई है। जांच पूरी होते ही शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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