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भर्तियों के ‘गड़े मुर्दो’ को जिंदा करेगी सरकार

हरिशंकर मिश्र, लखनऊ 1लोक सेवा आयोग की भर्तियों से जुड़े जो दस्तावेज प्रतियोगी छात्रों की पुरजोर मांग के बावजूद नहीं सार्वजनिक हुए, राज्य सरकार अब उन्हें खंगालने जा रही है। यह दस्तावेज सीबीआइ को सौंपे
जाएंगे ताकि वह जांच के बिंदु तय कर सके।
इसके लिए अन्य सभी जानकारियां भी जुटाई जा रही हैं। जांच केंद्र में सर्वाधिक विवादों में रही परीक्षाएं तो रहेंगी ही, बंद कमरों में हुई सीधी भर्ती के पदों की नियुक्तियां भी रहेंगी। प्रतियोगी छात्रों के आरोप और उनके साक्ष्यों की स्क्रीनिंग भी होगी। इससे न सिर्फ भर्तियों का पूरा सच उजागर होगा बल्कि कई चेहरे भी बेनकाब होंगे। 1भर्तियों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर मुख्यमंत्री के तेवर को देखते हुए अधिकारी विशेष रूप से सक्रिय हुए हैं। आयोग में हुई नियुक्तियों में सच को छिपाने की सबसे अधिक कोशिशें डॉ. अनिल यादव के कार्यकाल में हुई हैं, जबकि जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियों को भी नहीं उपलब्ध कराया जाता था। अब उन सारे मामलों के अभिलेख जुटाए जाएंगे। सपा शासन में सीधी भर्ती के तहत होने वाली नियुक्तियों में पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं लेकिन इसके साक्ष्य सामने नहीं आ सके हैं। ऐसी लगभग 600 भर्तियों पर नियुक्तियां हुई हैं जिसमें ढाई सौ से अधिक डॉ. अनिल यादव के कार्यकाल की हैं। प्रवक्ता समाज शास्त्र के नौ पदों पर सात अभ्यर्थी ओबीसी की एक ही जाति के चुने गए थे, यह प्रकरण भी अब फिर उठेगा। अधिकारियों का मानना है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में वैसा ही नियुक्ति घोटाला सामने आ सकता है, जैसा कि पंद्रह साल पहले पंजाब लोक सेवा आयोग में उजागर हुआ था। 1प्रतियोगी छात्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी के शासनकाल में आयोग की हर भर्ती अलग-अलग कारण से विवादों में रही है और अधिकारियों ने अभ्यर्थियों को संतुष्ट करने का प्रयास भी नहीं किया। मसलन जिस समय यह फैसला लिया गया कि अब छात्रों के नाम के साथ उनकी जाति नहीं लिखी जाएगी, तो इसके पीछे कोई ठोस तर्क नहीं बताया गया। इसी तरह ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) के जरिए यह व्यवस्था कर दी गई कि कोई अभ्यर्थी दूसरे का परिणाम न देख सके। इसके पीछे मंशा साफ थी कि नियुक्तियों की सच्चाई सामने न आ सके। ऐसे फैसलों से पीसीएस, लोअर, अभियोजन अधिकारी जैसी मुख्य परीक्षाओं के नौ हजार से अधिक पदों को लेकर संदेह खड़े हुए तो कृषि तकनीकी सहायक की छह हजार से अधिक नियुक्तियां अदालत में अटकीं। सीबीआइ जांच से पहले अधिकारी इन सारे मामलों के दस्तावेज एकत्र करने में जुट गए हैं, ताकि टीम के मांगने पर उन्हें दिया जा सके।

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