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लोग कहते हैं कि 99 हजार बचेंगी तो 72 हजार जायेगी, 72 हजार बचेगी तो 99 हजार जायेगी, दोनों बचेगी तो शिक्षामित्र जाएंगे:इस प्रकार यूपी के इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाई होगी....

Rahul pandey जी की कलम से : दिनांक 22 फरवरी को होने वाली सुनवाई यदि नहीं टलती है और हाई कोर्ट के आदेश तब तक चुनौती नहीं हो पाते हैं तो उस दिन की डिबेट से ही फैसला हो सकता है , मगर इसकी सम्भावना कम है ।

मेरा कहने का मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला हाई कोर्ट में चल गया मगर हाई कोर्ट का हवाला सुप्रीम कोर्ट में नहीं चलेगा ।
बात वेटेज कि की जाये तो मेरा मानना है कि राज्य फुल टीईटी मेरिट बना सकती है ।
चयन का आधार राज्य का विषय है।
जो यह सोचते हैं कि राज्य को वेटेज देना NCTE की भाषा में अनिवार्य है तब उनको यह भी सोचना होगा कि फिर टीईटी मेरिट नहीं बनायी जा सकती है ।
मैं थोड़ा अलग सोचता हूँ ,
लोग कहते हैं कि 99 हजार बचेंगी तो 72 हजार जायेगी, 72 हजार बचेगी तो 99 हजार जायेगी ।
दोनों बचेगी तो शिक्षामित्र जाएंगे आदि-आदि ।
मगर मेरा मानना है कि यदि 99 हजार डूबी तो 72हजार के बचने का कोई सवाल ही नहीं है ।
99 हजार को तो सिर्फ सिलेक्शन बेस के लिए लड़ना है और सिलेक्शन बेस उनका बचा तो सब बच जाएंगे लेकिन 72 हजार को तो पूर्णयता सर्विस रूल पर न होने के कारण अभी कई मुसीबतों का सामना करना होगा ।
उदाहरण:
1. 72हजार वाले चाहेंगे कि 99 हजार लोगों का सिलेक्शन बेस न बचे ।
2. हमारी कमी को कोई न उठाये ।
जबकि 99 हजार और 1.37 लाख शिक्षामित्रों के पास 72825 को तहस नहस करने के शिवाय कोई विकल्प नहीं बचा है ।
1.37 शिक्षामित्र तो चाहेंगे कि 72825 जैसे वो भी हैं यदि वे बचेंगे तो हम भी बच जायेंगे , 99 हजार कहेंगे कि हमारा सिलेक्शन बेस अल्ट्रावायरस है तो हम अवैध हैं तो फिर 72825 का तो सर्विस रूल से ही वास्ता नहीं है तो वो क्यों वैध हैं ?
इस प्रकार यूपी के इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाई होगी ।
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