मेरी याची बनने की कहानी मेरी जुबानी...............

आज पछलारा याची बनने के लिए मैं घर से निकला ,घर भर बस यही बात के प्रार्थना कर रहा था की मैं बढ़िया से याची बन जाऊ,,अम्मा ने व्रत भी रख लिया की और भवानी मैया से प्रार्थना की आज बेटा याची बनने का
सर्टिफिकेट शाम को लाकर दिखा देगा तभही व्रत तोड़ेंगे हम,,पुरे टाइम उधेड़ धुन में था की के बढ़िया से याची बनाएगा,,सच माने अइसन तनाव IAS का पेपर देते समय नहीं हुआ जितना याची प्रोडक्शन करने वाले कंपनी को सेलेक्ट करने में था,,
छोटी बड़ी कंपनी को मिला 100 मई से कोनव् एक को ही चुनना था,,चौराहे पर पंहुचा की एक चमचमाती कंपनी का बोर्ड लगा था की हियाह याची बनाये जाते है तो मैं भी पूछ ताछ करने लगा की कौन कौन सी सुबिधा उपलब्ध है,,सही बता रहे की पता नहीं कानून के कोने कोने भाषा बोल दिए साहब की समझ तो कुछु नहीं आया लेकिन अंदर से लगा की काम का आदमी है,,पेपर और पैसा देने को ही थे तभी फोन एक मित्र का आया बात चीत में पता लगा की ई कोनव् हिमांशु राणा की कंपनी है जो बिलुकल स्पीक एशिया कंपनी की तरह है जो लोग लुभावन वादे तो करती है पर येन टाइम टोपी पहना देती है,,बाकी जो मुद्दा पकरे आज तक उका कभि पूरा नहीं करते,,बच गए भैया,,
फिर सोचे तनिक आगे बढे तो अजय ठाकुर की दुकान मिल गयी,चुकी अब हम अलर्ट हो ही गए थे तो कायदे को मुँह में पान दबा किनारे खड़े हो केवल और जो लोग आ रिहे थे उनको सुनने लगे,1 घंटा सुने सबका सही बता रहे दिमाग लगा फट के छीछालेदर हो जायेगा,पता चला की ई तो शुद्ध ससुरा पागल और लुटेरा है इनके कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर में से एक अरसद थे जेके कनपटी पर बन्दूक लगा के ई पूरा पैसे डकार गया,,अरसद पर बड़ी दया आई हमका पर जब उनका पोस्टमॉर्टम किये तो पता लगा की इनको कुछ आता न जाता जिस दिन हियरिंग होती है उससे पहले ये हॉस्पिटल जाकर इमरजेंसी में फुटवा खिंचा लेत हैं केस के साथ साथ इनको भी दुआ की जरुरत होत है ।
बने है भाग्य विधाता,,
बड़े चिंता में थे की दोपहर हो गया कोई मिला नहीं,,1 ग्लास गन्ना जूस डकारे फिर बढ़ लिए आगे,अब तो और बुरी हालत मेरी,,जेहर देखो तेहर याची के दुकान, जैसा लगा की इल्लहाबद के मीरगंज में आ गए,,एक हसीना इधर से खींचे कोई उधर से की आ जाओ साहब बढ़िया चकाचक है सब,,हम तो ठहरे बनिया,,ऐसे थोड़ी न दाम दे देंगे ऐरे गैरे को,,सब का दुतकार कहा थू,, वही मा 72825 कंपनी के बड़े बड़े डायरेक्टर भी मिले निया निया दुकान  लगाये,,तनके में ताड़ लिया भैया की ई तो पूरा फ्राड है,,,निकल लिय पतली गली पकड़,,हनुमान जी के मंदिर जाकर उनके चरण में फाट पड़े की प्रभु शाम होने को आई का करे हम,,एक मित्र मन्दिर में प्रसाद चढाने के बाद हम को देख कहा भैया काहे दुखी हो,,हम रुहंदे गले से बोले क्या बताये भैया हम लग रहा अपने जीवंन में कभी याची नहीं बन पाएंगे,,अरे मानो हनुमान जी महराज स्वयं हमको याची बनाने को प्रकट हो गय उन भाई साहब में,,बताया की नंबर 1 का याची बनना हो तो मयंक तिवारी के कंपनी में अपनी नाप दे आओ,,हम सोचे ई भी कोनव दलाल है,,हम स्टार्ट किये करना पोस्टमॉर्टम,,सही बता रहे भैया दिखा दिया हमका की ई तो ऐसा आदमी है जो करोड़ो कमाने का मौका सामने आने पर उ पे लात मार दिया,वकील का पैनल दईया रे दईया ,,पूरा इंडियन क्रिकेट टीम लेकर उतरता है एक से एक दिग्गज,,पूरा काम भी एक दम गजबे तरीके से,,हम हुए व्याकुल की भैया अब देरी न करो अम्मा भूखी है,,तुरन्त हम गए मयंक कंपनी के पास ,अपने सूट का नाप दिया रसीद लिया,, भगे घर तुरन्त,,,आँख में आँशु भर अम्मा बाउ जी का पैर छु के गर्व से कहाँ
^अम्मा आप का बेटूआ आज याची बन गया^^,,जा अब व्रत तोड़ दिहा,,
रात में बढ़िया बढ़िया पकवान खा के चैन के नीद हम सूत गयी,,,,,
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