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पांच साल की भर्तियों की सीबीआइ जांच से आयोग में बदलेंगे परीक्षा कार्यक्रम

इलाहाबाद : उप्र लोकसेवा आयोग की पांच साल की भर्तियों की सीबीआइ जांच शुरू हो गई है। जांच टीम ने लखनऊ में दस्तक दे दी है और अगले सप्ताह इलाहाबाद स्थित मुख्यालय पर आने के आसार हैं।
इस
जांच का असर भले ही गड़बड़ी करने वाले आयोग के अफसर व कर्मचारियों पर पड़ेगा लेकिन, फिलहाल आयोग की अन्य परीक्षाएं व रुटीन कार्यक्रम इससे प्रभावित होना तय माना जा रहा है। इसकी शुरुआत पीसीएस की मुख्य परीक्षा से ही हो सकती है।
आयोग की चुनिंदा परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप लंबे समय से लग रहे हैं। वहीं, पिछले सात वर्ष से उनकी जांच सीबीआइ से कराने की मांग भी हो रही थी, पिछली सरकारों ने जांच कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। वहीं, भाजपा सरकार के राज्य में आने के बाद से जांच होने की चर्चा तेज रही, बाद में अपेक्षा के अनुरूप जांच का एलान से लेकर सीबीआइ का नोटीफिकेशन तक जारी हुआ। इस दौरान आयोग का कामकाज कुछ समय को छोड़कर (परीक्षा परिणाम व साक्षात्कार पर रोक) सामान्य रूप से चलता रहा। आयोग ने शासन की मंशा के अनुरूप वर्षो से लंबित कई परीक्षा परिणाम जारी किए साथ ही पीसीएस प्रारंभिक 2017 परीक्षा भी कराई। सूत्रों की मानें तो आयोग के बड़े अफसरों को उम्मीद थी कि सरकार ने भले ही जांच का आदेश कर दिया है लेकिन, संवैधानिक संस्था के कारण यहां की जांच नहीं हो पाएगी। इसीलिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। आयोग को कोर्ट से मामूली राहत मिली लेकिन, जांच पर रोक नहीं लगी। हाईकोर्ट से स्थिति स्पष्ट होते ही सीबीआइ की जांच टीम सक्रिय हो गई है। पिछले दिनों लखनऊ में कार्मिक विभाग व अन्य स्थानों पर तमाम अभिलेख जुटाए गए हैं। जांच टीम ने प्रतियोगियों से भी संपर्क करके भर्तियों में गड़बड़ी के साक्ष्य मांगे है। तैयारी है कि टीम जल्द ही आयोग मुख्यालय इलाहाबाद में दस्तक देगी। ऐसे में यहां के कामकाज पर असर पड़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

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